गीता पाठ सुनाते स्वामी ब्रह्मस्वरुपानंद। स्रोत : दल
पानीपत।जनसेवा दल द्वारा श्री कांशीगिर मंदिर में शनिवार को गीता पाठ का तीसरा दिन रहा। वाचक ऋषिकेश के मानव चेतना केंद्र से स्वामी ब्रह्मस्वरुपानंद रहे। तीसरे दिन महाराज ने प्रवचन में बताया कि वास्तव में संसार स्वप्न और माया का स्वरूप है। जीवन मिथ्या है केवल ब्रह्म ही सत्य है। प्रधान कृष्ण मनचंदा और सचिव चमन गुलाटी ने कथाव्यास स्वामी ब्रह्मस्वरुपानंद और ब्रह्मऋषि का अभिवादन किया।
स्वामी ने कहा कि उमा कहूं मैं अनुभव अपना, सत हरि भजन जगत सब सपना की उक्ति ही भगवान शिव का जीवन के प्रति वास्तविक उदघोष है। जैसी दृष्टि होगी वैसी सृष्टि दिखाई देगी। नजर बदली तो नजारे बदल गए, किश्ती बदली तो किनारे बदल गए। यह संसार, जीवन नश्वर है हमें विनाशी के लिए रोना चाहिए। अविनाशी प्रभु को पाने के लिए भक्ति के माध्यम से व्याकुल और निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया। सचिव चमन गुलाटी ने बताया कि रविवार मार्गशीर्ष संक्रांति पर समारोह का समापन होगा। इस अवसर पर धर्म प्रचारक युधिष्ठिर शर्मा, राजू कथूरिया, श्यामसुंदर शर्मा, लेखराज जताना, ओम प्रकाश सिंधवानी व योगेश शर्मा उपस्थित रहे।