पानीपत। नगर निगम अधिकारियों ने करीब 80 विकास कार्यों की राशि चुपके से बढ़ा दी। अधिकारी एक या दो साल नहीं बल्कि छह साल तक रेट बढ़ाने का खेल करते रहे। 2016 से 22 तक के कामों पर सवाल उठे तो मामला एंटी करप्शन ब्यूरो में पहुंचा। निगम से कई बार रिकॉर्ड तलब करने के बाद अब यहां भी जांच ठंडी पड़ गई है।
नगर निगम में विकास कार्यों बढ़ाने के नाम गड़बड़ी का मामला करीब दो साल पहले खुला था। प्रथम दृष्टया गड़बड़ी नजर आई थी। इसकी एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच कराई गई। एंटी करप्शन ब्यूरो से शुरुआत में जांच तेज की लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य होता चला गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस मामले की जांच सही की जाए तो 15 से 20 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी जा सकती है। इसमें दायरा और बढ़ाए तो यह राशि और भी बढ़ सकती है।
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दो से ढाई गुना की राशि बढ़ाई
नगर निगम अधिकारियों ने एक काम का टेंडर 20 लाख रुपये का लगा दिया। अधिकारी स्थानीय स्तर पर आसानी से इसका टेंडर और वर्क ऑर्डर कर देते हैं। वे बाद में काम की जरूरत बताकर इसकी राशि बढ़ा देते हैं। कई कामों में दो से ढाई गुना तक राशि बढ़ाई गई है। 20 लाख का काम 50 लाख रुपये तक में किया गया है। संबंधित ठेकेदारों को इनका भुगतान भी कर दिया गया है।
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राशि बढ़ाने का यह है नियम
निगम अधिकारी किसी भी टेंडर की राशि स्वयं नहीं बढ़ा सकते। संबंधित पार्षद और विधायक की स्वीकृति पर उसकी राशि का प्रस्ताव बनाया जाता है। नगर निगम आयुक्त इसकी मंजूरी देते हैं। इसके बाद इसकी राशि बढ़ाई जाती है। मामला खुलता है तो कई पार्षदों के साथ उस समय के निगम आयुक्त पर भी आंच आ सकती है।
वर्जन :
मैंने पिछले दिनों ही पानीपत में ज्वाइन किया है। नगर निगम के टेंडर बढ़ाने का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। ऐसा कोई मामला है तो पता कर रिपोर्ट ली जाएगी।
रणबीर, प्रभारी, एंटी करप्शन ब्यूरो, पानीपत।
वर्जन :
निगम के कुछ काम और रेट बढ़ाए गए थे। ये काम उनके कार्यकाल से पहले के हैं। इनकी एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा जांच चल रही है।
पुनीत, एसई, नगर निगम।