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Panipat News: 77वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का शानदार आगाज

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समालखा। निरंकारी मिशन के भोड़वाल माजरी स्थित आध्यात्मिक स्थल पर तीन दिवसीय 77वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का शनिवार को शानदार आगाज हुआ। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज फूलों से सजी पालकी पर सवार होकर पंडाल में पहुंचीं।
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इस दौरान अनुयायी उनके दर्शनों को आतुर दिखे। यहां करुणा और दिव्यता का सुंदर नजारा देखने को मिला।
मंच तक उनका स्वागत एक भव्य शोभायात्रा के रूप में किया गया। निरंकारी इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड आर्ट्स के 300 से भी अधिक विद्यार्थियों ने नृत्य व संगीत के माध्यम द्वारा दिव्य युगल गुरु माता और राजपिता का अभिनंदन किया। इस तीन दिवसीय संत समागम में विश्व के कई देशों से श्रद्धालु पहुंचे हैं।
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि परमात्मा जानने योग्य हैं। इसे जानकर जब हम इसे अपने जीवन का आधार बना लेते हैं, तब सहज रूप में हमारे जीवन में मानवीय गुणों का विस्तार होता चला जाता है।
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सतगुरु माता ने अपने प्रवचनों में कहा कि युगों से संतों, पीरों ने यही संदेश दिया कि हमें अपनी आध्यात्मिक यात्रा करते हुए मानवता के काम ही आना है। परमात्मा द्वारा प्रदान की चीजें व इंसानों के आविष्कार का सदुपयोग करते हुए इस धरा को और अधिक सुंदर बनाना है। वास्तविक रूप में ‘असीम की ओर-विस्तार, यह एक अंदर से बाहर की दिव्य यात्रा है।
अक्सर मन में तनाव और दिल व दिमाग के तालमेल की बात आती है। वास्तव में मन और मस्तिष्क दोनों ही साथ हैं, परंतु कभी मन कुछ और चाहता है और मस्तिष्क कुछ और सोचता है। जब हम इस परमात्मा संग जुड़ जाते हैं, तब मन में स्थिरता आ जाती है और अपनत्व का भाव उत्पन्न हो जाता है फिर मन विशाल बन जाता है।
प्रदर्शनी देख हर कोई हुआ आनंदित
प्रथम दिन दिव्य प्रदर्शनी शुरू की गई। प्रदर्शनी को तीन भागों में विभाजित किया गया है। जिसके प्रथम भाग में भक्तों को मिशन के इतिहास, विचारधारा और सामयिक गतिविधियों के अतिरिक्त सतगुरु की ओर से देश और विदेशों में की गई दिव्य कल्याणकारी प्रचार यात्राओं की पर्याप्त जानकारी है।
द्वितीय भाग में संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग के सभी उपक्रमों और गतिविधियों को दर्शाया है। तृतीय भाग के अंतर्गत बाल प्रदर्शनी को बड़े ही मनमोहक और प्रेरणादायक रूप में बाल संतों द्वारा प्रदर्शित किया गया है।
अनुयायी हाथ जोड़कर खड़े
अनुयायी आनंदित होकर अपनी नम आंखों के साथ हाथ जोड़ते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज के स्वागत भक्तिभाव आनंदित नजर आए।दिव्यता का यह अनुपम नजारा मिल सुंदर भावना को वास्तविक रूप में साकार कर रहा था। इसमें हर कोई अपनी जाति, धर्म, भाषा को भुलाकर केवल प्रेम भक्ति में सराबोर नजर आया।
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