फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Panipat News: टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगा एसटीपी का शोधित पानी, निगम 56 करोड़ में बिछाएगा पाइपलाइन

विज्ञापन
सेक्टर 29 में सड़क किनारे जमा दूषित पानी। संवाद
विज्ञापन
जगमहेंद्र सरोहा
विज्ञापन

पानीपत। औद्योगिक शहर में जल संरक्षण और अपशिष्ट जल (वेस्ट वाटर) के पुनर्चक्रण को लेकर नगर निगम ने अब तक की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। सिवाह गांव स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से साफ किए गए पानी (ट्रीटेड वेस्ट वाटर) को सेक्टर-29 की टेक्सटाइल और डाइंग यूनिटों को दिया जाएगा।
निगम इसके लिए एक मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। नगर निगम इस कार्य के लिए 56.29 करोड़ का टेंडर जारी किया है। इस प्रोजेक्ट के मूर्त रूप में आने के बाद औद्योगिक इकाइयों में भूजल को बचाया जा सकेगा।
विज्ञापन


इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत सिवाह स्थित 25 और 35 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी हैं। इनसे रोजाना 60 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) ट्रीटेड पानी निकलता है। इस नए प्रोजेक्ट पर पाइपलाइन से सेक्टर-29 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के टैंकों में ट्रांसफर किया जाएगा।
इस परियोजना के धरातल पर उतरने से भूजल के दोहन पर भारी रोक लगेगी। इस साफ किए गए पानी का उपयोग सेक्टर-29 के टेक्सटाइल उद्योगों में डाइंग व अन्य कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इसके साथ पार्कों में बागवानी में प्रयोग किया जाएगा। इससे ताजे भूजल की बड़ी बचत होगी।

700 दिनों में पूरा होगा इंफ्रास्ट्रक्चर, 15 साल का रहेगा करार
नगर निगम के कार्यकारी अभियंता सुमित नांगल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग, कंस्ट्रक्शन, इरेक्शन, टेस्टिंग और कमिशनिंग के लिए ठेकेदार एजेंसी को 700 दिनों (लगभग 23 महीने) का समय दिया जाएगा।
इसका निर्माण कार्य पूरा होने और डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (डीएलपी) समाप्त होने के बाद अगले 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव (ओएंडएम की जिम्मेदारी भी इसी निर्माण एजेंसी की होगी। इस टेंडर की अंतिम तिथि तीन जुलाई है। इसी दिन बिड खोली जाएगी। इसकी बयाना राशि करीब 1.12 करोड़ रुपये तय की है।

एचएसवीपी सिंचाई विभाग से लेता है पानी
एचएसवीपी सेक्टर-29-टू में 600 प्लॉट हैं। इनमें 350 डाइंग यूनिट हैं। इनके साथ कई टेक्सटाइल और दूसरी उद्योग हैं। इस सेक्टर के सीईटीपी से आसपास की 18 बड़ी औद्योगिक इकाइयों का पानी भी जोड़ा गया है। इन उद्योगों से हर रोज करीब 42 एमएलडी पानी आता है।
एचएसवीपी ने इसके लिए 21-21 एमएलडी के दो सीईटीपी बना रखे हैं। एचएसवीपी टेक्सटाइल डाइंग यूनिटों के लिए सिंचाई विभाग से हर रोज पानी लेता है। सिंचाई विभाग नहर आधारित पानी इन यूनिटों को देता है। इसके बाद भी पानी की मांग रहती है।

10 से 50 हजार लीटर पानी की खपत
सेक्टर-29-टू में 500 और 1000 गज में डाइंग यूनिट हैं। 500 गज की डाइंग यूनिट में हर रोज 10 से 20 हजार लीटर पानी की खपत होती है। एक हजार लीटर की डाइंग यूनिट में हर रोज करीब 50 हजार लीटर तक पानी खपत होता है। इन डाइंग यूनिट में सिंचाई विभाग से सीमित पानी मिलता है। बाकी पानी की पूर्ति ट्यूबवेल से करते हैं। इससे सेक्टर के साथ शहर का भूजल लगातार कम होता जा रहा है। सेक्टर में ही करीब 150 फीट पर पानी है।

वर्जन

साफ पानी से बचेगी उद्योग
उद्यमी पिछले पांच साल से एसटीपी के पानी की मांग कर रहे हैं। वे हर मंच पर इसकी मांग रख चुके हैं। एसटीपी का पानी पूरी तरह से साफ होने पर प्रयोग में लाया जा सकता है। इसमें किसी प्रकार की गुणवत्ता कम होने पर बॉयलर को नुकसान हो सकता है।
प्रशासन जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) को भी बना सकता है। इसका करीब 300 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। सरकार नमामि गंगे प्रोजेक्ट से भी मदद ले सकती है। -नितिन अरोड़ा, प्रधान, पानीपत डायर्स एसोसिएशन।
विज्ञापन


वर्जन :

सिवाह एसटीपी का पानी सेक्टर-29 में पहुंचाने का प्रोजेक्ट बनाया है। इस पानी उद्योग या पार्कों में बागवानी के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इस पानी के प्रयोग से भूजल को बचाया जा सकता है। -सुमित नांगल, कार्यकारी अभियंता, नगर निगम।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें