पानीपत। टेक्सटाइल नगरी पानीपत आज जिले के रूप में 32 साल की हो गई है। अब हमारी टेक्सटाइल नगरी युवा अवस्था में आ चुकी है। 64 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैली टेक्सटाइल नगरी देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में जिले के दो विधायकों को मंत्री बनाया गया है। 32 साल के पानीपत ने विश्व भर में अपनी टेक्सटाइल क्षेत्र में एक जगह बनाई है।
पानीपत का कंबल, बेडशीट, कुशल कवर, तौलिया व बाथमेट विश्व के 85 देशों में इस्तेमाल होता है। पानीपत टेक्सटाइल के क्षेत्र में चीन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पानीपत ने कई क्षेत्रों में चीन को पछाड़कर अपना लोहा मनवाया है। अमेरिका व यूरोप के देशों की पहली पंसद पानीपत की ही है।
पहले पानीपत तहसील के रूप में करनाल का हिस्सा था। एक नवंबर 1989 को पानीपत को करनाल से अलग कर दिया था। इसके बाद 24 जुलाई 1991 को पानीपत को दोबारा करनाल का हिस्सा घोषित कर दिया गया था।
इससे पानीपत के लोगों में निराशा फैल गई। यहां के लोगों ने पानीपत को अलग जिला बनाने के लिए कई बार पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल व बंसीलाल से मुलाकात की। सरकार ने यहां के लोगों की भावनाओं को समझा और एक जनवरी 1992 को पानीपत का एक जिले में के रूप में जन्म हुआ। पानीपत की चार तहसीलें बनाई गई। इसके बाद पानीपत के टेक्सटाइल की क्रांति शुरू हुई थी।
16 हजार करोड़ का निर्यात, 90 हजार करोड़ की घरेलू मार्केट ःपानीपत निर्यात के क्षेत्र में प्रदेश में गुरुग्राम के बाद दूसरे स्थान पर है। पानीपत से हर साल 16 हजार करोड़ का माल निर्यात होता है। कोरोना के बाद यह 20 हजार करोड़ तक पहुंच गया था। पिछले डेढ़ साल में इसमें कुछ कमी आई है। पानीपत की घरेलू मार्केट 90 हजार करोड़ की है। यहां देश के हर कोने से लोग कंबल व बेडशीट खरीदने के लिए आते हैं।