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दस मिनट में दस योजनाओं का शुभारंभ

Mon, 03 Feb 2014 05:07 PM IST
पानीपत
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पांच घंटे लेट होने पर जितनी तेजी से सिविल अस्पताल में पहुंचे और उतनी ही तेजी से उद्घाटन और शिलान्यास कर चले गए।
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उन्होंने अपने पूरे दस मिनट में दस योजनाओं की सौगात जिलेवासियाें को दी। वह उद्घाटन व शिलान्यास करने के बाद उतनी ही तेजी से निकल गए। इसके चलते कई लोग हक्के-बक्के रह गए। सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का रविवार को पानीपत में शिलान्यास और आधारशीला रखने के अलावा नई सब्जीमंडी में धन्यवाद सम्मेलन को संबोधित करना था। उनको सुबह साढ़े 10 बजे सिविल अस्पताल में पहुंचना था। लेकिन कोहरे के चलते उनका हेलीकाप्टर दिल्ली से उड़ान नहीं भर सका और दोपहर बाद ही उनको सड़क मार्ग से निकलना पड़ा।

किसी का गुलदस्ता लिया तो किसी का छूटा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मौसम खराब होने की चिंता थी। इसके चलते उन्होंने कांग्रेसी नेताओं को भी इतना समय नहीं दिया। उन्होंने गाड़ी से उतरकर गार्ड ऑफ ऑनर लेने और कांग्रेसी नेताओं से मिलने में मात्र दो मिनट लगाए। कांग्रेसी उनको गुलदस्ते भेंट करने में जुट गए। इस दौरान वहां रखे गमले भी गिर गए। सीएम ने नेताओं से बचने का प्रयास किया और मैट से भी नीचे चले गए। लेकिन अगले ही पल वे संभले। सीएम के उद्घाटन व शिलान्यास के दौरान भी गुलदस्ते भेंट करने का सिलसिला चलता रहा। इस दौरान किसी के गुलदस्ते लिए गए तो किसी के वहीं पर छूट गए।
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ऐसे चला घटनाक्रम
- 2:49 बजे सीएम अपने काफिले के साथ सिविल अस्पताल पहुंचे।  
- 2:51 बजे विकास ज्योति जलाई।
- 2:53 बजे एक ही मिनट में एक के बाद एक तीन योजनाओं का उद्घाटन किया।
- 2:54 बजे एग्रो मॉल व पॉली क्लीनिक का उद्घाटन किया।
- 2:55 बजे थर्मल के सेवा भवन का उद्घाटन व दो सौ बेड के सिविल अस्पताल की आधारशिला रखी।
- 2:56 बजे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के जाटल रोड व सिवाह का अलग-अलग व फिर ड्रेन नंबर एक की रिमॉडलिंग का उद्घाटन किया।

पुलिस के कहने पर भी लोग नहीं आए बाहर
सिविल अस्पताल में उद्घाटन स्थल पर पुलिस के सुरक्षा प्रबंधों में शुरू से ही चूक रही। एसपी सतीश बालन ने पहुंचने के बाद व्यवस्था को बनाने का प्रयास किया। उन्होंने डीएसपी जोगेंद्र, इंस्पेक्टर शमशेर सिंह व सिटी इंस्पेक्टर रमेश कुमार को सुरक्षा व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी सौंपी। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा की दृष्टि से एक बार सबको बाहर जाने को कहा, लेकिन कोई भी बाहर नहीं निकला। वे सब इधर-उधर टहलते रहे।
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