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Panipat News: निमाोनिया से नवजातों को बचाएगी टीम

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पानीपत। निमोनिया से हो रही मौत के आंकड़ों पर नियंत्रण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग सांस अभियान की शुरुआत कर रहा है। यह अभियान शुक्रवार से 28 फरवरी तक चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मी और आशा घर-घर जाकर सर्दी, खांसी से पीड़ित बच्चों की जांच करेंगी। साथ ही बच्चों के मां-पिता को स्वास्थ्य संबंधित परामर्श देंगी। जांच के दौरान संदिग्ध निमोनिया के बाल रोगियों को जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया गया जाएगा। एएनएम व आशा कार्यकर्ताओं को निमोनिया की पहचान के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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निमोनिया के लक्षण

निमोनिया होने के लक्षणों में खांसी जुकाम, तेजी से सांस लेना, सांस लेते समय पसली चलना या छाती का नीचे धंसना, तेज बुखार आना, झटके आना, सुस्ती या अधिक नींद आना होता है। सर्दियों के मौसम में यह समस्या देखने को मिलती है।

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बचाव
नवजातों को सर्दी से बचाएं
नवजातों को सर्दी से बचाने का प्रयत्न करें। बच्चों को ठंडी वस्तुओं का सेवन न करने दें। अगर कोई मां अपने बच्चों को दूध पिलाती है तो उससे पहले उसको अच्छे से अपने हाथ धो लेने चाहिए। धुएं के कारण भी बच्चों में निमोनिया की समस्या होती है। इसलिए नवजातों को धुंए से दूर रखें।
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पांच वर्ष तक के बच्चों में रहता है निमोनिया का खतरा : डॉ. शशि

डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग ने बताया कि पांच वर्ष तक के बच्चों में निमोनिया का खतरा रहता है। सर्दियों में निमोनिया की ओपीडी भी बढ़ जाती है। निमोनिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीसीवी टीकाकरण किया जा रहा है। निमोनिया रोधक पीसीवी वैक्सीन की पहली डोज डेढ़ माह पर, दूसरी डोज साढ़े तीन माह पर और बूस्टर डोज नौ माह पर लगाया जाता है। इस अभियान में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पीसीवी टीकाकरण से छूटे बच्चों की सूची तैयार करती है और उनका टीकाकरण किया जाता है। पांच वर्ष तक के बच्चों के अभिभावक सर्दी के मौसम में अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। निमोनिया रोधक पीसीवी टीकाकरण करवाएं और निमोनिया के लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
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