पानीपत। विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के दौरान शिक्षकों को बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) की ड्यूटी में मानसिक दबाव बढ़ रहा है। हाल ही में जिला नागरिक अस्पताल में बीएलओ में ड्यूटी लगने से मानसिक रूप से परेशान दो शिक्षिकाएं आई हैं। इनमें से एक शिक्षिका स्वयं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर चुकी है, वहीं दूसरी शिक्षिका को पैनिक अटैक आ चुका है। इससे उन्हें कई दिन अस्पताल में भर्ती भी रहना पड़ा।
जिला नागरिक अस्पताल में मनोरोग काउंसिलर किशोर ने बताया कि ड्यूटी के दौरान कई बार अतिरिक्त काम करने से व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान हो जाता है। बीएलओ में ड्यूटी लगने से शिक्षकों को लगातार कई घंटे काम करना पड़ रहा है। इससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें और उनके परिवार को शांतिपूर्वक व सामंजस्य से काम करना चाहिए और कोई भी परेशानी होने पर एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। परिवार के सदस्यों को भी उनकी स्थिति समझनी चाहिए ताकि उन पर मानसिक दबाव बढ़े न और वे शांतिपूर्वक काम कर अपने परिवार के साथ रह सकें।
काउंसलिंग के लिए पहुंची एक शिक्षिका ने बताया कि वह पहले निर्धारित समय पर स्कूल जाती थी और घर आती थी। बीएलओ की ड्यूटी लगने से उनके आने-जाने का कोई समय नहीं रहा था। शाम को देर तक काम पूरा करना होता था। इससे वे अपने परिवार के साथ समय भी नहीं बिता पा रही थी। काम का दबाव और अपने से दूरी होने के कारण वह मानसिक रूप से इतनी परेशान रहने लगी और उन्हें एक दिन ड्यूटी के दौरान ही पैनिक अटैक आ गया। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
दूसरी शिक्षिका ने बताया कि बीएलओ में ड्यूटी लगने से काम पूरा न होने की चिंता में उन्हें हर समय बेचैनी और घबराहट रहने लगी थी। किसी से बात करने का मन भी नहीं करता था और काम के बाद परिवार वालों से दूर अकेली एक कमरे में रहने लगी थी। रात को सोते समय भी फोन पर अधिकारियों के फोन या मैसेज आने का डर लगा रहता था कि कहीं अगले दिन के लिए और ज्यादा काम न मिल जाए। इन सबसे परेशान होकर मैंने एक बार स्वयं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की। तब परिवार वालों ने मुझे काउंसलिंग के लिए समझाया। अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं और काम व परिवार के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश कर रही हूं।
अस्पताल में ऐसे कई मामले आए हैं जो अपने अधिकारियों और काम के दबाव के कारण स्वयं को नुकसान पहुंचा चुके हैं। ऐसे में व्यक्ति को परिवार का सहयोग मिलना जरूरी है और व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने मन की बात किसी न किसी से अवश्य साझा करे ताकि मानसिक दबाव को कम किया जा सके।
डॉ. मोना नागपाल, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल।