पानीपत। शुगर मिल की डिस्टलरी को पहले नई डिस्टलरी बनाने और बाद में एथेनॉल प्लांट बनाने का 15 एकड़ में 150 करोड़ की लागत से बनने वाला प्रोजेक्ट पांच साल से अटका पड़ा है। कभी अधिकारियों के नियम-कायदे बदल जाते हैं तो कभी प्रोजेक्ट में संशोधन कर दिया जाता है। अब इस प्रोजेक्ट का बार बार टेंडर होते हुए करीब दो साल हो चुके हैं। जिसमें कभी भाग लेने वाली एजेंसी नियमाें को पूरा नहीं कर पाती तो कभी दो से ज्यादा एजेंसी का नियम पूरा नहीं होता। एक बार फिर शुक्रवार को मिल अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट का टेंडर लगाया है।
गांव डाहर स्थित नए शुगर मिल में ये प्रोजेक्ट करीब 15 एकड़ जमीन पर 150 करोड़ रुपये से बनाया जाएगा। इसकी खास बात ये होगी कि ये प्लांट अत्याधुनिक बॉयलर और मशीनों से लैस होगा। जिसमें शराब नहीं केवल एथनॉल का ही उत्पादन होगा। जिसकी क्षमता 90 किलो लीटर प्रति दिन होगी। वहीं, गोहाना रोड स्थित पुराने शुगर मिल की डिस्टलरी से भी कुछ प्लांट को नए मिल की डिस्टलरी में शिफ्ट किया जाएगा। इसका वर्क आर्डर होने के 14 से 16 महीने में इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले वाले प्रोजेक्ट की डिस्टलरी की क्षमता केवल 45 किलो लीटर प्रतिदिन की थी, जिसे 95 करोड़ में तैयार किया जाना था। जिसके बाद इस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया था।
इनसे बनेगा एथेनॉल, ईंधन में मिलाया जाएगा
इस प्लांट में रोजाना 90 किलोलीटर एथेनॉल में से 60 किलोलीटर का उत्पादन शुगर मिल के शीरे से होगा। वहीं, 30 किलोलीटर एथनॉल चावल से बनेगा। इस एथनॉल को पेट्रोल डीजल में मिलाने के लिए मिल रिफाइनरी को बेचेगा। इसमें देश का सबसे आधुनिक बॉयलर लगाया जाएगा, जिसकी कीमत करीब 20 से 30 करोड़ की बताई जा रही है। ये बॉयलर डिस्टलरी के निकासी के गंदे पानी को सूखा कर इससे भांप बनाएगा। इस प्लांट में पुरानी डिस्टलरी से एमई प्लांट, ग्रेन प्लांट, एथनॉल प्लांट, सीओटू प्लांट समेत डिस्टीलेशन प्लांट को भी शिफ्ट किया जाएगा।
वर्जन:
पहले प्लांट की क्षमता 45 केएलपीडी से बढ़ाते हुए 90 केएलपीडी की गई। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली एजेंसी नियम पूरे नहीं कर पाई। जिसकी वजह से इस प्लांट का प्रोजेक्ट कई साल से अटका है। अब फिर से टेंडर निकाला गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाया जाएगा।
विपिन ढाका, डिस्टलरी मैनेजर।