शुगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने का प्रपोजल शुगर फेड और मिल प्रबंधन के बीच खींचतान में उलझकर रह गया है। शुगर फेड शाहबाद मिल की पुरानी मशीन यहां भेजने की बात कह रहा है, जबकि मिल प्रबंधन इससे इंकार कर रहा है।
शुगर फेड और मिल प्रबंधन द्वारा अपने-अपने दावों पर अड़ने से गन्ना उत्पादक किसानों को चिंता बढ़ गई है। पानीपत मिल को पहले शिफ्ट किया जाना था, लेकिन किसानों के विरोध के चलते इसको वापस लेना पड़ा।
मिल प्रबंधन ने इसकी क्षमता दोगुना करने की योजना बनाई और शुगर फेड को भेज दी। शुगर फेड ने मिल के लिए नई मशीनों की मंजूरी देने की बजाय शाहबाद शुगर मिल की पुरानी मशीन देने की कह दी, जिसको लेकर पानीपत शुगर मिल प्रबंधन खफा हो गया और पुरानी मशीन मिल में लाने से मना कर दिया।
17 हजार क्विंटल होती है हर रोज पेराई
पानीपत चीनी मिल की पेराई क्षमता 17 हजार क्विंटल प्रतिदिन है। मिल की मशीन पूरे सीजन के दौरान करीब 22 लाख क्विंटल गन्ने की ही पेराई कर पाती है। इस बार क्षेत्र मेें करीब 60 लाख क्विंटल गन्ने की पैदावार होने का अनुमान है। मिल की क्षमता न होने पर जिले के किसानों को दूसरे जिलों के मिलों में गन्ना डालना पड़ता है।
सरप्लस गन्ना लेने से दूसरी मिल भी हटी पीछे
किसानों को सरपलस गन्ना डालने की चिंता सता रही है। मिल प्रबंधन क्षेत्र के सरप्लस गन्ने को पड़ोसी मिलों में भेजने की कह रही है, लेकिन कई गांवों के किसान दूसरी मिलों में गन्ना डालने को तैयार नहीं हैं।
गांव जौरासी में करीब 30 हजार, पूठर में 20 हजार, बुआना लाखु में 20 हजार, पलड़ी में छह हजार व कैत में पांच हजार क्विंटल तक सरप्लस गन्ना है। किसान सुमित शाहपुर, धर्मबीर मुख्याल, धर्मबीर जौरासी, प्रवीन पुठर और पवन बुलाना लाखु ने बताया कि गन्ना उत्पादक किसानों को भारी परेशानी हो रही है।
नए को पर्ची नहीं, पुरानों की बोंडिंग वहीं
पानीपत मिल भले ही गन्ना उत्पादन में इस बार सबसे आगे चल रहा है, फिर भी नए गन्ना उत्पादक किसानों को दिक्कत उठानी पड़ी। नया गन्ना उत्पादक किसानों बोंडिंग पुरानी है। उनको पर्ची समय पर नहीं मिल पा रही। इससे किसानों को भारी परेशानी हो रही है।
किसानों की समस्या का समाधान जरूरी
भाकियू के जिला प्रधान चूहड़ सिंह और शुगर मिल के डायरेक्टर जितेंद्र भापरा ने बताया कि जिले के गन्ना उत्पादक किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मिल प्रबंधन को किसानों की समस्या समझनी चाहिए और पेराई क्षमता को दोगुना किया जाए। इससे किसानों को राहत मिलेगी और गन्ने की खेती को बढ़ावा मिलेगा।