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Panipat News: खेल-खेल में पढ़ाई के नए कौशल सीखेेंगे विद्यार्थी

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पानीपत। प्रदेश सहित जिले के राजकीय प्राथमिक स्कूलों में बालवाटिका-3 के अंतर्गत बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने की विभिन्न गतिविधियां सिखाई जाएंगी। विद्यार्थियों की नींव को प्राथमिक स्कूल शिक्षक बालवाटिका स्तर से ही शुरू करेंगे। कक्षा के कक्ष में चार अलग-अलग कोने भी बनाए जाएंगे जहां पठन-सामग्री से विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा।
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बालवाटिका को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका-3 को पढ़ाने वाले शिक्षकों को गत सप्ताह पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हो चुका है। यह प्रशिक्षण डायट संस्थान में आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में शिक्षकों ने बच्चों की नए कौशल पढ़ाने के गुर सीखे। इसके बाद यह शिक्षक स्कूलों में विद्यार्थियों को उसी तरीके से पढ़ाई करवाएंगे। इसमें जिले के सभी मॉडल संस्कृति स्कूलों के बाल वाटिका-3 कक्षा के शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं जिले के पांचों खंड के नॉन मॉडल स्कूलों के बालवाटिका-3 कक्षा के शिक्षक, शिक्षिकाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह प्रशिक्षण जिले में 02 दिसंबर से शुरू हुआ था जिसमें सभी पांचों खंडों में 7 समूहों में 293 शिक्षकों ने एवं 15 एबीआरसी ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

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कक्षा-कक्ष में बनेगा किताबों का कोना



एक कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों को सीखने के लिए विभिन्न गतिविधियां करवाई जाएंगी। इन गतिविधि में कक्षा के हर कोने में कला कोना, अभिनय कोना, किताबों का कोना आदि गतिविधि होगी। प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रशिक्षार्थियों को शिक्षक संदर्शिका के महत्व, कार्य पुस्तिका के प्रयोग, सर्वांगीण विकास के पंचकोष सिद्धांत, प्रिंट रिच कक्षा-कक्ष के महत्व के बारे में बताया। कक्षा-कक्ष में पुस्तक कोना, अभिनय कोना, कला कोना, जोड़-तोड़ कोना बनाने का महत्व भी प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा रहा।
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ये गतिविधि होगी आयोजित
1. कला कोना- इसमें क्ले रंग, पेंट, रंगीन कागज आदि की सामग्री होगी।

2. अभिनय कोना- इसमें किचन सेट, डॉक्टर सेट, पंपेट आदि होगें जिसमें बच्चे कुछ बना सकें।



3. जोड़-तोड़ कोना- इसमें आकार किट, ब्लॉक्स, जिगर्सी, पजल, क्रम कार्ड व अन्य सामग्री होगी।

4. किताबों का कोना- इसमें बिग कुक, चित्र पुस्तकें, चित्र चार्ट, कविता, पोस्टर जैसी पठन सामग्री होगी।



5. खोज कोना- इसमें तराजू, चुंबक, बीज, पौधे, माने वाला टेप व अन्य सामग्री होगी जिसमें बच्चे आसपास के वातावरण के बारे में खोजबीन कर सकें।

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ऐसी होगी बालवाटिका दैनिक योजना

दैनिक योजना में बच्चे प्रतिदिन 4-5 घंटे के लिए बालवाटिका कक्षा में आएंगे। इस दौरान बच्चे कहानियों, निर्देशित खेल, मुक्त खेल चर्चा गतिविधियों से जुड़ेगे। विद्यार्थियों को रोजाना शेड्यूल बनाकर पढ़ाई करवाई जाएगी। इनमें सुबह की सभा के लिए 30 मिनट, मॉर्निंग सर्कल टाइम 30 मिनट, ब्रेक 10 मिनट, मुक्त खेल 50 मिनट, कहानियां व निर्देशित खेल 45 मिनट, गतिविधियां व अभ्यास-पुस्तिका पर कार्य 35 मिनट, ब्रेक 30 मिनट और गुडबॉय सर्कल टाइम 10 मिनट का होगा।




वर्जन-

बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने ओर उनका सर्वांगीण विकास करने के लिए बालवाटिका-3 के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। योजना का उद्देश्य बच्चे का संज्ञानात्मक विकास, अन्नमय कोष और प्राणमय कोष, भाषा और साक्षरता विकास, रचनात्मक और सौंदर्य विकास, सामाजिक भावनात्मक और नैतिक विकास करना है।
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- सुभाष चंद्र भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
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