कर्मचारी यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में कर्मचारियों ने काम छोड़कर सरकार के विरोध में नारेबाजी की। हड़ताल के चलते रोडवेज का चक्का लगभग जाम रहा। बिजलीकर्मी और नगर निगम के साथ ही अन्य विभागों के कर्मचारी भी जमकर गरजे। हड़ताल के चलते यात्रियों को बस नहीं मिली। न ही किसी सरकारी कार्यालय में ठीक से कोई काम हो सका। यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत ऑड-ईवन के विरोध में ऑटो चालकों के भी हड़ताल पर जाने से हुई। कई बैंकों की यूनियन के हड़ताल में शामिल से लेन-देन भी प्रभावित रहा। यूनियन ने हड़ताल 90 प्रतिशत सफल होने का दावा किया, जबकि अधिकारी हड़ताल को 50 प्रतिशत सफल होने का दावा कर रहे हैं।
सर्व कर्मचारी संघ और कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल रही। बिजली यूनियन वीरवार रात दस बजे ही हड़ताल पर चली गई, जबकि रोडवेज यूनियन शुक्रवार अल सुबह डिपो पर पहुंची और हड़ताल शुरू की। इसके साथ नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, डाक विभाग, आंगनबाड़ी, आशा वर्कर आदि कई विभागों की यूनियन ने हड़ताल को समर्थन दिया। सभी यूनियन अपने-अपने कार्यालयों में बैठक कर जुलूस के रूप में लघु सचिवालय पहुंची। वहां सभी यूनियनों ने एकजुटता दिखाई और सरकार के विरोधी में नारेबाजी की। यूनियन नेताओं ने सरकार की नीतियों और अनदेखी पर चिंता व्यक्त की। यूनियन ने शाम को पांच बजे हड़ताल को चेतावनी के साथ खत्म किया।
बसों को एक घंटे पहले ही निकाल दिया
प्रशासनिक और रोडवेज अधिकारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान बसों को चलाने का पूरा प्रयास किया। पुलिस के आला अधिकारी अल सुबह ही डिपो पर फोर्स के साथ पहुंच गए। डीएसपी मुख्यालय जगदीप दूहन और सीआईए-वन इंचार्ज अजय मोर ने तड़के साढ़े चार बजे रोडवेज बसों को डिपो से बाहर निकाला, जबकि बस का समय सुबह साढ़े पांच बजे का था। अधिकारियों ने चालक दल को बस को निर्धारित रूट पर चलाने की हिदायत दी। डीआरओ बीएस बठला और डीएसपी जगदीप दूहन के प्रयास से करीब 20 बसों को यूनियन के पहुंचने से पहले मार्गों पर रवाना कर दिया गया था। डीआरओ बीएस बठला ने रोडवेज जीएम एमएस खर्ब को बस चलाने के लिए कहा, तो जीएम ने कहा कि उनके पास दस कंडक्टर हैं, लेकिन ड्राइवर नहीं हैं। उन्होंने कई ड्राइवरों से संपर्क भी किया। यूनियन नेताओं ने प्रशासन पर जबरदस्ती करने के आरोप लगाए।