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हड़तालः बगैर इलाज लौटे मरीज

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पानीपत। पानीपत सिविल अस्पताल के डॉक्टर बैठे हड़ताल पर, ओपीड़ी रही बंद। - फोटो : Panipat
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पानीपत। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर रहे। जिले के 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को इलाज नहीं मिला। सिर्फ आपातकालीन सेवाएं ही सुचारू रहीं। सिविल अस्पताल समेत स्वास्थ्य केंद्रों पर आ 1500 मरीजों को बगैर इलाज ही घर लौटना पड़ा। इनमें से सिविल अस्पताल से 850 और सीएचसी-पीएचसी में 650 रोगियों को इलाज नहीं मिला।
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सिविल अस्पताल में सुबह आठ बजे से ही मरीजों की भीड़ पर्ची काउंटर पर जुटना शुरू हो गई। वाह्य रोग विभाग में दिखाने के लिए उनकी पर्ची तो काटी गई, लेकिन वाह्य रोग विभाग में अपने कक्षों में डॉक्टर नहीं मिले। इस दौरान सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल के संदर्भ में अस्पताल में बैठक की। मांगें मानने के लिए सरकार को दो दिन का वक्त दिया है। इस दौरान अगर सरकार ने मांगें नहीं मानी तो शुक्रवार से आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर देने का निर्णय किया गया है।
बैठक में डॉ. नारायण डबास, डॉ. राजीव मान, डॉ. कविता, डॉ.शालिनी मेहता, डॉ. रितू, डॉ. प्रीति, डॉ. रजत, डॉ. अर्चना और डॉ. वीरेंद्र ढांडा मौजूद रहे। डॉक्टरों की मांग है कि एसएमओ की सीधे भर्ती न हो। इन पदों को प्रमोशन के आधार पर भरा जाए। डॉक्टरों की तीन के बजाय चार, नौ, 13 और 20 वर्ष में दी जाए। विशेषज्ञों के लिए अलग से काडर तैयार किया जाए।
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अस्पताल प्रबंधन ने खुलवाया काउंटर
अस्पताल प्रबंधन की तरफ से मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पर्ची और दवाओं का काउंटर खुलवाया गया। खांसी एवं जुकाम से संबंधित मरीज काउंटर से पर्ची बनवा कर काउंटर से दवा लेकर जाते रहे। वहीं जो मरीज पुरानी पर्ची लेकर इलाज के लिए पहुंचे थे, उनकी पर्चियों पर नई तारीख डाल दी गई। इसके बाद वे काउंटर से दवा लेकर चले गए।
आपातकालीन सेवाएं ही चलीं
एसोसिएशन की तरफ से पोस्टमार्टम सहित अन्य आपातकालील सेवाओं को सुचारू रखने का फैसला लिया गया है। एसोसिएशन ने पहले ही मंगलवार को हड़ताल पर जाने की सूचना दे दी थी। नागरिक अस्पताल में पोस्टर चस्पा कर आमजन से भी सहयोग की अपील की गई थी। मंगलवार को अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड, गर्भवतियों की डिलीवरी की सेवाएं व एसएनसीयू वार्ड की सेवाएं जारी रहीं।
इन ओपीडी के मरीजों को हुई भारी परेशानी
सिविल अस्पताल में हर रोज बुखार, खांसी, जुकाम की 250 से अधिक ओपीडी होती है। मंगलवार को डॉक्टर हड़ताल पर रहे, इसलिए इन मरीजों को इलाज नहीं मिला। ये काउंटर से दवा लेकर घर लौट गए। नेत्र रोग विशेषज्ञ भी हड़ताल पर थे। नेत्र रोगियों की हर रोज 120-140 ओपीडी होती है। इन मरीजों को भी बिना इलाज घर लौटना पड़ा। स्किन रोगियों की सिविल अस्पताल में हर रोज 250-300 के बीच ओपीडी होती है। जिले में स्किन का एक ही डॉक्टर है। जिले के दूर दराज के लोग भी सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। इनको भी बिना इलाज घर लौटना पड़ा। 40 मनोरोगी, 60 ईएनटी, 70-80 हड्डी रोगी व 100 से अधिक महिला रोगियों को बिना इलाज घर लौटना पड़ा।
ये हैं डॉक्टरों की मांगें
यहां फंसा है पेंच
मांगों पर सरकार से डॉक्टरों की सहमति भी हो चुकी है। फाइल स्वास्थ्य मंत्री अनिल से पास होकर सीएमओ ऑफिस में है। मांगें वित्त विभाग से जुड़ी हैं, लेकिन यहां से फाइल पास नहीं होने के कारण ही नया नोटिफिकेशन जारी नहीं हो पा रहा है। इसी कारण वित्त विभाग के एसीएस से डॉक्टरों की बैठक तय की गई थी।
बोले रोगी-
पेट में दर्द रहता है। इसलिए वो सुबह यहां महिला रोग विशेषज्ञ को चेक कराने आई थी। यहां आकर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर है। अब उनको निजी अस्पताल में जाना पड़ेगा। - रुखसार निवासी मोहन नगर
सरकार को मरीजों की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। जब सरकार को पता था कि डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे तो सरकार ने पहले ही दूसरे विकल्प क्यों तैयार नहीं किए। वो पेट संबंधी रोग से परेशान है। -पार्वती, हरिनगर
पहले भी कई बार मिल चुके आश्वासन : डॉ. मान
एचसीएमएसए के जिला प्रधान डॉ. राजीव मान ने कहा कि मंगलवार को सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल की है। दो दिन में अगर सरकार ने उनकी मांगें मानकर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया तो शुक्रवार को सभी प्रकार की इमरजेंसी सेवाएं बंद कर दी जाएगी। सरकार को जल्द उनकी मांगे माननी होगी।

पानीपत। सिविल अस्पाताल पानीपत में गर्भवाती महिला के जांच की डॉ हड़ताल पर जाने के कारण बंद पड़ा कम- फोटो : Panipat

पानीपत। वही सिविल अस्पताल पानीपत में जहां डॉक्टर हड़ताल पर बैठे, तो दुसरी और जहां पुरे अस्पताल मे- फोटो : Panipat

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