टीनएजर्स की रफ्तार से पुलिस और शहर परेशान है। तेज रफ्तार के साथ ये टीन एजर्स वाहनों पर खतरनाक स्टंट करने से भी नहीं चूकते।
चलते वाहनों पर मोबाइल से बात करना तो आम है। इसका खामियाजा बड़ा दुर्घटना को आमंत्रण देकर चुकाया जाता है। अभिभावकों की बेफिक्री इस समस्या को बढ़ा देती है।
मतलौडा के शेरा गांव में सोमवार सुबह हुए हादसे ने ऐसे अभिभावकों पर सवाल खड़ा कर दिया है। अमर उजाला ने मंगलवार को शहर की सड़कों पर इन टीनएर्ज के वाहन चलाने के ढंग को देखा।
कई टीनएजर्स तेज गति एवं स्टंट करते मिले। कई स्कूली छात्र अपने साथ दूसरे बच्चों की भी जान खतरे में डालते नजर आए। इस तेज स्पीड में लड़कियां भी पीछे नहीं हैं।
अभिभावक खुद करते हैं गिफ्ट
अभिभावक अपने बच्चों को वाहन गिफ्ट करने में खुशी महसूस करते हैं। कुछ तो अपनी दिक्कतों को कम करने के लिए वाहन देते हैं। ये बच्चे स्कूल और ट्यूशन के नाम पर जमकर स्टंट करते हैं। ऐसे में एक छोटी से गलती भारी पड़ सकती है।
चालान काटने पर हो चुका है बवाल
अक्तूबर माह में सेक्टर 11-12 चौकी पुलिस ने तीन अलग-अलग बाइकों पर सवार बच्चों को रुकवाया था। पुलिस ने सभी बच्चों से उनके लाइसेंस और बाईक के कागजात मांगे थे।
पुलिस के कागजात मांगते ही बच्चों ने परिजनों को फोन कर मौके पर बुला लिया था। परिजन खुद बच्चों के समर्थन में उतर आए थे और पुलिसकर्मियों को जमकर धमकाया था। इनमें एक बिजली निगम के एक अधिकारी का भतीजा भी था। थाना चांदनी बाग प्रभारी पहुंचे थे और मामले की नजाकत को देखते पुलिसकर्मी को ही पीछे हटना पड़ा।
हादसे ने ली थी एक छात्र की जान
गांव शेरा में सोमवार सुबह कार से स्कूल आ रहे टीन एजर्स ने पांचवी कक्षा के बच्चे नितिन को कुचल दिया था, जबकि गौरव को गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
नितिन की मौके पर ही मौत हो गई थी। गौरव का इलाज अब भी असंध रोड स्थित संकल्प अस्पताल में चल रहा है। बच्चे को कुचलने के बाद टीन एजर्स कार को मौके पर छोड़कर भाग गए थे।
मृतक नितिन अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। अभिभावकों को मजबूरीवश मंगलवार को आरोपी नाबालिग को पुलिस के सामने पेश करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और आरोपी को बुधवार को कोर्ट में पेश करेगी।
परिजनों को अपने बच्चों को यातायात के नियमों को समझाना चाहिए। हाई प्रोफाईल परिजनों के बच्चे ही वाहन चलाते हैं। पुलिस स्कूल के सामने चालान काटती है तो बच्चे अपनी बाइकों को कहीं और खड़ा करना शुरू कर देते है। जिससे चोरियां भी बढ़ जाती है। 18 साल से कम आयु के बच्चों को वाहन चलाना गैरकानूनी है। बच्चों को यातायात के नियमों का पाठ पढ़ाने के लिए स्कूलों में यातायात नियमों की परीक्षा करवाई जा रही है। बावजूद इसके शहर की सड़कों पर टीन एजर्स दोपहिया व गाड़ी लेकर चल रहे हैं।
विकास कुमार, प्रभारी, हाईवे थाना बाबरपुर पानीपत