संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। चातुर्मास में तीसरे दिन शुक्रवार को राजाखेड़ी गांव में एसएस जैन सभा में रमण मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मोबाइल और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। शहर में अग्रवाल मंडी और गांधी मंडी, राजाखेड़ी गांव, समालखा और मतलौडा में जैन मुनि लोगों को आध्यात्मिकता से जोड़ने के लिए चार माह के चातुर्मास में प्रतिदिन सुबह सवा आठ से साढ़े नौ बजे तक प्रवचन दे रहे हैं।
एसएस जैन सभा राजाखेड़ी के प्रधान राहुल जैन ने बताया कि सुबह प्रवचन शुरू होने से पहले ही सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु सभा में पहुंच रहे हैं। रमण मुनि महाराज ने लोगों को जीवन में सफलता प्राप्त करने का मंत्र बताया। महाराज ने कहा कि मोबाइल का नशा और अपशिष्ट पदार्थों का नशा व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर देता है। इसलिए जीवन में यदि कोई नशा करना है तो वह भगवान का करें और सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें।
धर्म के प्रति आस्था रखने और प्रभु स्मरण करना जरूरी : राजेंद्र मुनि
जैन स्थानक गांधी मंडी में चातुर्मास में डॉ. राजेंद्र मुनि और राजेश मुनि ने धर्म के प्रति आस्था रखने और प्रभु स्मरण का संदेश दिया। महाराज ने कहा कि व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो उसे अपने धर्म के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा रखनी चाहिए। धर्म के प्रति आस्था का होना जरूरी है क्योंकि धर्म ही हमें सुख और दुख दोनों समय में प्रभु से जोड़े रखता है।
दूसरे जीवों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए : मनोज मुनि
एसएम जैन सभा अग्रवाल मंडी में मुनियों ने श्रद्धालुओं को दूसरों के प्रति दया और सहानुभूति की भावना रखने के लिए जागरूक किया। सभा में चातुर्मास के तीसरे दिन मनोज मुनि, विशाल मुनि, पवित्र मुनि, नरेंद्र मुनि, आनंद मुनि ने प्रवचन दिए।
मनोज मुनि महाराज ने एक आत्मा को 84 हजार योनियों के बाद मनुष्य की योनि प्राप्त होती है। इसलिए इस योनि में हमें दूसरे जीवों के प्रति सहानुभूति व दया की भावना रखनी चाहिए। अनबोल जीव-जंतुओं की मदद करना ही सच्चा
धर्म है और इसे ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए जीवन में अपनी क्षमतानुसार दूसरों की सहायता अवश्य करनी चाहिए।
नरेंद्र मुनि ने गोसेवा करने के लिए किया प्रेरित
मतलौडा। मतलौडा जैन स्थानक में चल रहे चातुर्मास में नरेंद्र मुनि ने शुक्रवार को लोगोंं को गाेसेवा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गोसेवा ही मानव जीवन के लिए परम कर्तव्य माना जाता है। इसके लिए हमें आगे आकर अपना योगदान देना होगा।
उन्होंने बताया कि सड़कों पर घूमती बेसहारा गोवंश को रोटी खिलाना आज के समय में सबसे बड़ा पुण्य का कार्य माना जाता है। साथ ही गोशाला में अपने सामर्थ्य अनुसार दान देकर पुण्य का भागी बनना चाहिए। संवाद