पानीपत। गांव की मिट्टी में खेली और बढ़ी शीतल मलिक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल हैंडबाॅल का परचम लहराया। वे आज उसी खेल में अपने गांव की युवा पीढ़ी को पारंगत कर रही हैं। शीतल मलिक को प्रदेश सरकार ने आउट स्टेंडिंग खेल प्रतिभा को देखते हुए 2021 में जूनियर कोच नियुक्त किया। तत्कालीन खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह ने उनको नियुक्ति पत्र दिए थे। शीतल मलिक यहां तक ऐसे ही नहीं पहुंची। उन्होंने इसके लिए कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वे पानीपत की पहली हैंडबाॅल खिलाड़ी हैं तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेली हैं और हैंडबाॅल खेल के आधार पर कोच बनी हैं।
शीतल मलिक ने बताया कि उसका जन्म उग्रा खेड़ी गांव में किसान सुभाष मलिक के घर हुआ। वह हर रोज गांव के स्टेडियम के साथ होकर स्कूल जाती थी। आठवीं कक्षा में उसके मन में खेलों में आगे आने का विचार आया। उन्होंने अपने पिता सुभाष मलिक से इस बारे में बात की। परिवार ने उनको खेलों में आगे आने का पूरा मौका दिया। मैदान पर नवदीप मलिक ने उनको प्रशिक्षण दिया। उस समय गांव में मैदान नहीं था और न ही हैंडबाॅल थी। उसके पिता ने उनको हैंडबाॅल लाकर दी। उन्होंने मैदान पर मेहनत करनी शुरू कर दी। उसके इकलौते भाई की 12वीं कक्षा में मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद पूरा परिवार टूट गया था। परिवार ने हिम्मत बंधाई और वह खेलों में फिर उतरी।
शीतल ने 2005 के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा
शीतल ने बताया कि उसने एक खेल चुनना था तो उसने हैंडबाॅल में रुचि दिखाई। जिला स्तर पर 2005 में प्रतियोगिता में भाग लिया। इसके बाद 2007 में अंडर-17 स्कूल नेशनल में उत्तर प्रदेश फैजाबाद में भाग लिया। 2010 में अंतरराष्ट्रीय साउथ एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया और कांस्य पदक जीता। जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में 2010 से कांस्य पदक जीता। वूमन नेशनल प्रतियोगिता में 2013 में स्वर्ण और 2017 में रजत पदक जीता। नेशनल गेम्स 2015 में स्वर्ण पदक जीता। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण, राष्ट्र स्तर पर 12 स्वर्ण, 13 रजत और 17 कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
पति कर्मजीत भी हैं हैंडबाल खिलाड़ी
शीतल ने बताया कि उसकी शादी 2017 में फतेहाबाद निवासी कर्मजीत सिंह के साथ हुई। वे हैंडबाल के खिलाड़ी रहे हैं और अब पंजाब पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। उनको प्रदेश सरकार में छह अक्टूबर 2021 में खेलों में आउट स्टेंडिंग पर खेल विभाग में जूनियर कोच नियुक्त किया। वह शिवाजी स्टेडियम में तैनात हैं और अब उग्रा खेड़ी स्थित हैंडबाल की खेल नर्सरी में हैं। यहां सुबह व शाम खिलाड़ियों को पारंगत कर रही हैं। पिता सुभाष मलिक और उनके ससुर ने उनका खेलों में पूरा साथ दिया। उन्होंने शादी के बाद भी खेल शुरू रखा। वह खेल के साथ अपनी पढ़ाई करती रही और एनआईएस की।