पानीपत। आवाज के बिना संवाद की कल्पना नहीं की जा सकती है, लेकिन लोगों की लापरवाही आवाज पर भारी पड़ रही है। लोगों की तेज बोलने और तीखा खाने की आदत उसकी आवाज को खराब कर रही है।
इन्हीं कारणों के चलते व्यक्ति में गले से संबंधित बीमारियां बढ़ रही हैं। यही नहीं धूम्रपान भी आवाज को खराब कर रहा है।
गौरतलब है कि उपरोक्त हालात के चलते चलते जिला नागरिक अस्पताल में ईएनटी के मरीजों की ओपीडी दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगी है। हर रोज ईएनटी की ओपीडी लगभग 200 तक पहुंचने लगी है। जबकि तीन-चार साल पहले ओपीडी इसके आधे से भी कम थी। 16 अप्रैल को विश्व आवाज दिवस है। इसका उद्देश्य आवाज के महत्व और गले की समस्याओं संंबंध में जागरूकता बढ़ाना है।
जिला नागरिक अस्पताल में कान, नाक और गला की चिकित्सक डॉ. शिवांजलि कालड़ा ने बताया कि वर्तमान समय में लोग घर का खाना न खाकर बाहर का तीखा खाना पसंद करने लगे हैं। जिससे गले संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।
खाने का तीखापन लोगों में गले से आने वाली आवाज को प्रभावित करता है और इससे कई बार हमारे गले की आवाज अवरुद्ध भी हो जाती है। वहीं लोगों खासतौर पर युवाओं में एल्कोहल व धूम्रपान की लत बढ़ने लगी है, जो गले की कैंसर का मुख्य कारण बन रही है।
युवा इसकी तरफ जल्दी आकर्षित हो रहे हैं और गले की बीमारियों का शिकार बन रहे हैं। चिकित्सक बताते हैं लोग तेज और ऊंचा बोलते हैं। इससे भी लोगों की आवाज खराब हो रही है। कई बार देखने में आता है कि स्कूल में अध्यापक अक्सर तेज आवाज में विद्यार्थियों से बात करते हैं। जिससे कुछ समय के बाद उनके गले में दर्द रहना शुरू हो जाता है।
इसलिए अध्यापकों व लोगों को चाहिए कि वे धीमी आवाज में बातें करें। यदि किसी को तीन सप्ताह से ज्यादा गले में किसी भी प्रकार का दर्द रहता है या गला अवरुद्ध सा लगता है तो बिना देरी किए उसे चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और बीमारी का पहले ही उचित समय पर इलाज लेना चाहिए। संवाद