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Panipat News: सजने लगी श्याम बाबा की चुलकाना नगरी, भक्तों के लिए बिछाया जाएगा कारपेट

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समालखा। श्री श्याम बाबा की चुलकाना नगरी फाल्गुन मेले के लिए सजने लगी है। चुलकाना धाम का पूरा क्षेत्र फूलों और लाइटों से सजाया जाने लगा है। कोलकाता से आठ क्विंटल फूल मंगवाए गए हैं। इनसे बाबा का विशेष शृंगार किया जाएगा। बाबा के शृंगार में ड्राई फ्रूट्स की 51 मालाओं का उपयोग किया जाएगा। यह भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। गांव के अड्डे से मंदिर गेट तक लाइटें लगेंगी और कारपेट बिछाया जाएगा। मंदिर में बाबा के दर्शनों के साथ सुरक्षा के भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
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फाल्गुन माह की एकादशी और द्वादशी पर चुलकाना के श्रीश्याम मंदिर में वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार फाल्गुन मेला 27 और 28 फरवरी को होगा। इसमें दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे। श्री श्याम बाबा सेवा मंदिर समिति के प्रधान रोशनलाल छौक्कर ने बताया कि 27 फरवरी को एकादशी पर भक्तों का तांता लगेगा। भक्त यहां ठहरकर रात को जागरण का आनंद लेंगे और 28 फरवरी को द्वादशी पर श्याम बाबा की भव्य पूजा-अर्चना में शामिल होंगे। मेले के दौरान सुबह-शाम विशेष आरती की जाएगी। विद्वान पंडित बाहर से आएंगे। वे सुबह पांच बजे और शाम 6:30 बजे आरती करेंगे। यह आरती भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र होगी।फाल्गुन मेला प्रसिद्ध होता है। इसमें प्रदेश के साथ दिल्ली, यूपी, पंजाब व राजस्थान समेत कई राज्यों से भक्त दर्शन के लिए आते हैं। समिति ने लंगर, जलपान और अन्य सुविधाओं का भी प्रबंधन किए हैं।

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सुरक्षा के दृष्टिगत लगाए 46 सीसीटीवी कैमरे
प्रधान रोशनलाल छौक्कर ने बताया कि मेले की तैयारियां चरम पर हैं। मंदिर परिसर में 46 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से 150 सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। इनकी तीन शिफ्टों में ड्यूटी रहेगी। जिला पुलिस द्वारा पहले ही एक चौकी बनाई चा चुकी है। इसके अलावा भी सुरक्षा और यातायात की बेहतर व्यवस्था रहेगी। यातायात प्रबंधन के साथ भीड़ नियंत्रण के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
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स्वर्ण द्वारों पर भक्तों को होगा स्वागत का अहसास
चुलकाना धाम के चारों तरफ चार भव्य स्वर्ण द्वार बनाए गए हैं। ये द्वार समालखा-चुलकाना रोड पर, गांव छदिया रोड पर, गांव नामुंडा और ढिंडार रोड पर स्थापित हैं। इन द्वारों से गुजरते ही भक्तों को स्वागत का अहसास होगा। पार्किंग की व्यवस्था गांव के चारों तरफ बनाए स्वर्ण द्वारों के आसपास रहेगी।

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धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व
महाभारत काल में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान चुलकाना में दिया था। मान्यता है कि बर्बरीक ने घोर तपस्या से शिवजी से तीन अभेद्य बाण प्राप्त किए थे। वे इनसे महाभारत युद्ध को कुछ ही क्षणों में खत्म कर सकते थे। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वह युद्ध में हारने वाले पक्ष की तरफ से लड़ेंगे। श्रीकृष्ण जानते थे कि यदि बर्बरीक युद्ध में शामिल हुए तो जो पक्ष हारने लगेगा वह उनकी तरफ आ जाएगा और इस तरह युद्ध कभी खत्म नहीं होगा। श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धारण कर बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने चुलकाना धाम में एक बाण से पीपल पेड़ के पत्तों बांध दिया था। बर्बरीक ने बिना संकोच अपना शीश काट कर कृष्ण को दान कर दिया। उन्होंने श्रीकृष्ण से युद्ध देखने की इच्छा जताई थी। श्रीकृष्ण ने उनका शीश एक ऊंची पहाड़ी पर रख दिया। यह पेड़ आज भी चुलकाना धाम में स्थित है। युद्ध के बाद जब पांडवों ने पूछा कि युद्ध किसने जीता, तब शीश ने कहा कि उन्हें केवल कृष्ण का सुदर्शन चक्र और द्रोपदी का महाकाली रूप युद्ध क्षेत्र में दिखा। कृष्ण ने बर्बरीक के इस बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके नाम से पूजे जाएंगे। उनको हारे का सहारा भी कहा जाता है।
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