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रैन बसेरे पर ताला, यात्रियों को आफत

Sat, 07 Dec 2013 11:57 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत के जीटी रोड पर रैन बसेरे का बोर्ड यात्रियों और राहगीरों को बसेरे का रास्ता बेशक दिखा रहा हो,। लेकिन रैन बसेरे पर लटका ताला और बाहर किसी तरह का बोर्ड न होने पर लोग पूरी तरह से गुमराह और परेशान हो रहे हैं।
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लोग सर्दी की शुरूआत में ही सड़कों पर रात काटने को मजबूर हैं। प्रशासन और नगर निगम का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। सर्दी का मौसम शुरू हो गया और रात के साथ दिन का पारा भी घटने लगा है। ऐसे में लोगों को रैन बसेरे की याद आने लगी है। बस स्टैंड के बाहर लगे रैन बसेरे के बोर्ड के आसपास ही यात्री चक्कर खाकर रह जाते हैं। उनको इस बोर्ड से आगे कहीं पर रास्ता नहीं दिखाई देता।

चाबी फायर अफसर के पास
अमर उजाला माई सिटी ने सर्दी बढ़ने के बाद लोगाें की रैन बसेरे की जरूरत को देखते शनिवार को रैन बसेरे का दौरा किया। टीम दमकल विभाग कार्यालय में पहुंची जिसके प्रथम तल पर रैन बसेरा है। यहां पर बाहर किसी तरह का बोर्ड नहीं है और टीम पूछते हुए रैन बसेरे के दरवाजे पर पहुंची। वहां पर गेट पर ताला मिला। संबंधित कर्मचारियों से बात की वे ताला खोलने के नाम पर पीछे हट गए।
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उनसे चाबी के बारे में पूछा तो फायर अफसर का नाम ले दिया। उन्होंने जवाब दिया कि चाबी तो फायर अफसर के पास रहती है। वे शाम की शिफ्ट में किसी को दे जाते हों तो उनको इसकी जानकारी नहीं है। यहां सवाल उठता है कि फायर अफसर पांच बजे तक ड्यूटी पर रहते हैं और चाबी उनके पास होती है। शाम के समय वे चाबी को साथ ले जाते हैं तो यात्रियों व राहगीरों को रैन बसेरे का सहारा कैसे मिल सकता है।

एक कमरे में बना दिया रैन बसेरा
प्रशासन ने भी रैन बसेरा बनाते समय महिला और पुरुष यात्रियों के सोने की अलग-अलग व्यवस्था करने की तरफ ध्यान नहीं दिया। दमकल विभाग के प्रथम तल पर एक लंबे हाल में रैन बसेरे बनाया गया है। ऐसे में यहां किसी महिला को रात के समय शायद ही कोई बसेरा मिल सकें। यह उसकी सुरक्षा पर सवाल होगा।

दूर है फिर भी सुरक्षा नहीं
शहर का रैन बसेरा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सिविल अस्पताल से डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी पर है। दूसरे यहां पर सुरक्षा के भी खास बंदोबस्त नहीं हैं।

यात्रियों को देर रात को यहां पहुंचने के लिए ऑटो का महंगा किराया चुकाना पड़ेगा। यहीं कारण है कि एक साल तक रैन बसेरे तक कोई जरूरतमंद पहुंच नहीं सका है। वे यहां पहुंचने से ज्यादा बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर ही रात काटना बेहतर मानते हैं।

गद्दे और कंबल फांक रहे धूल
रैन बसेरे की आधी अधूरी तैयारी से लोगों को बीमार होने का डर है। गेट से बाहर के दृश्य से अंदर की तस्वीर साफ हो रही है। अंदर राहगीरों को गद्दे और कंबल तो जरूर मिल जाएंगे।

लेकिन वे धूल भरे होंगे। हो सकता है राहगीरों को गद्दे और कंबल को पहले खुद साफ करना भी पड़ जाएं। ऐसे में व्यक्ति यहां आसरा लेने के बजाय बीमार हो सकता है।

यहां हो सकते हैं इंतजाम
प्रशासन को राहगीरों के लिए रैन बसेरा बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन के नजदीक बनाना चाहिए। इससे राहगीरों को आसरा मिल सकेगा। प्रशासन के पास रेडक्रॉस के भवन के अलावा लालबत्ती स्कूल के पास खाली बिल्डिंग इसके विकल्प हैं।

वर्जन
रैन बसेरा दमकल विभाग के भवन में है, लेकिन उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। नगर निगम को इसमें व्यवस्था करनी होती है और उनकी ही जिम्मेदारी बनती है। रैन बसेरे में फिलहाल कोई नहीं आया है और गत वर्ष भी कुछ ज्यादा लोग यहां पर नहीं आए थे।
सत्यवान नरवाल, फायर अफसर, दमकल विभाग पानीपत

वर्जन
रैन बसेरा दमकल विभाग में बनाया गया है। उन्होंने अभी तक रैन बसेरे का मुआयना नहीं किया है। वे सोमवार को ही रैन बसेरे में व्यवस्थाओं को जांचेंगे। किसी तरह की कमी मिलने पर जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। राहगीरों व जरूरतमंदाें को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
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राहुल पुनिया, एमई, नगर निगम पानीपत
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