पानीपत। बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर लाइन में उतरे मजदूर की लापरवाही से जान जा चुकी है लेकिन अभी सैकड़ों मजदूरों की जान पर संकट बना है क्योंकि इनके पास सेफ्टी किट नहीं है। दूसरी ओर निगम अधिकारियों और ठेकेदारों का दावा है कि सुरक्षा के सभी उपकरण दिए जाते हैं। हालांकि मजदूरों का आरोप है कि ये उपकरण केवल कागजों में हैं। एजेंसी के मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के ही कार्य करते देखे जा सकते हैं।
इसकी धरातल पर पड़ताल करने के लिए ‘अमर उजाला’ टीम ने शुक्रवार को वार्ड नंबर 1 और 2 में अमरूत योजना के चल रहे सीवर लाइन प्रोजेक्ट का निरीक्षण करते हुए ग्रांउड रिपोर्ट की। इसके अलावा बरसत रोड पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। यहां बिना सुरक्षा उपकरणों के ही मजदूर काम करते दिखाई दिए। इतना ही नहीं देखने को यह भी मिला कि मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के ही पोकलेन मशीन के बकेट पर बैठकर ही जमीन के अंदर 20 फीट गहरे गड्ढ़े में आ जा रहे थे।
सुरक्षा के लिहाज से यहां पर मिट्टी के चारों ओर शटरिंग होनी चाहिए लेकिन बाहर बिना शटरिंग लगाए ही मजदूर रस्सी पकड़कर एक-दूसरे को थामे हुए थे। अगर यहां से खोदी गई ताजी मिट्टी जरा सी भी खिसक जाए तो एक साथ कई मजदूरों की जान ले सकती है। मजदूरों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ये उनकी आदत हो चुकी है।
ये होने चाहिए सुरक्षा उपकरण
सीवरेज लाइन बिछाने वाले मजदूरों के पास हाथ के दस्ताने, गम बूट, हैलमेट, ऑक्सीजन मॉस्क, जहां सीवर लाइन गहरी हो वहां शटरिंग, काम चलते समय मौके पर इंजीनियर और सबसे जरूरी सेफ्टी इंजीनियर होना चाहिए। हर साइट पर काम के पूरे ब्योरे के साथ निगम एक्सईएन, एमई और जेई का नाम और मोबाइल नंबर लिखा एक साइन बोर्ड होना चाहिए। इन साइन बोर्ड के अलावा साइट पर संकेतक भी होने चाहिए, जो आने जाने वाले लोगों को सचेत कर सकें कि आगे काम चल रहा है लेकिन इनमें से कुछ भी साइट पर नहीं दिखा।
एजेंसी के साथ होता है अनुबंध, हादसों तक होता है इंश्योरेंस
विशेषज्ञ बताते हैं कि नगर निगम और एजेंसी के साथ एक अनुबंध होता है। जिसमें काम के समय अगर किसी कर्मचारी के साथ हादसा होता है तो एजेंसी की ओर से उसका इंश्योरेंस तक किया जाता है लेकिन चर्चा है कि इस हादसे में इस हादसे में कर्मचारी का एजेंसी की ओर से कोई इंश्योरेंस नहीं किया गया था।
जांच के बाद कार्रवाई तय- एसई
अगर इस प्रकार से एजेंसी की ओर से काम किया जा रहा है तो इसकी गहनता से जांच होगी। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई होना तय है।
रमेश कुमार, एसई, नगर निगम।