पानीपत। वार्ड तीन के सुधीर नगर में 20 साल पहले बिछाई गई सीवर लाइन आज तक नहीं चालू हो पाई है। चार बार समाधान शिविर में शिकायत देने के बाद भी ये लाइन चालू नहीं हो पाई है। बुधवार को निगम अधिकारियों के निर्देशों पर एक एजेंसी के ठेकेदार ने खस्ताहाल मैनहोल को रिपेयर करने के लिए निरीक्षण किया लेकिन ठेकेदार ने स्पष्ट कर दिया कि वे केवल मैनहोल की रिपेयर तो कर सकते हैं। कॉलोनी की नालियों को सीवर लाइन में नहीं जोड़ सकते। जबकि दूसरी ओर नालों के ब्लॉक होने से कॉलोनी की नालियों का पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में भरने लगा। इसकी फिर से शिकायत की गई तो निगम अधिकारियों ने सफाई कर्मियाें को भेज नालों की सफाई करवा दी।
इस पर शिकायकर्ता नरेश वर्मा ने कहा कि नगर निगम अधिकारी नहीं चाहते कि ये सीवर लाइन चालू हो। इसके कई कारण हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सीवर लाइन आज तक अधिकारियों के रिकॉर्ड में नहीं थी। इसके बिछाने के पीछे एक बड़ा घोटाला किया गया है। आरटीआई से इसकी जानकारी निकलवाई तो ये सामने आई। इसमें पाइपलाइन बहुत छोटी और कम क्षमता की लगाई हे। अधिकारियों को पता है कि अगर इसमें निकासी की लाइन जोड़ दी जाएगी तो ये पहले दिन ही ब्लॉक हो जाएगी और उनके पास फिर से शिकायतों का भंडरा तो लगेगा ही साथ में जिन अधिकारियों ने पाइपलाइन बिछाई थी उनकी पोल भी खुल जाएगी। शिकायकर्ता ने कहा कि अब वे समाधान शिविर में पांचवीं बार शिकायत के साथ मौके पर धरना भी देंगे।
ये है मामला:
वार्ड नंबर तीन के सुधीर नगर में जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से 2004 में मंशाराम हाई स्कूल से लेकर जट्टू चौक तक सीवर लाइन तो बिछाई गई थी लेकिन इसे चालू नहीं किया गया। इस लाइन को बिछाने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। आरटीआई कार्यकर्ता नरेश वर्मा ने आरटीआई के माध्यम से 2018 में इसका खुलासा किया। इस खुलासे को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जनस्वास्थ्य विभाग ने यहां की जमीन खुदाई कर दफन सीवर लाइन को ढूंढ निकाला लेकिन केवल औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इसे फिर से छोड़ दिया गया। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सीवर लाइन के मैनहोल के ढक्क्न ही उपर उठाए और कागजोें में इसे चालू दिखा दिया। जबकि ये लाइन चालू नहीं हो सकी। अब पिछले चार समाधान शिविर में इसकी शिकायत की जा चुकी है लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा।
वर्जन:
मामला संज्ञान में है। आज मौके पर टीम भी भेजी थी। लोगों ने टीम को काम नहीं करने दिया।
राजेश कौशिक, एक्सईएन, नगर निगम।