पानीपत। खोजकीपुर गांव की सीमा आज ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक हैं। कभी घर के कामकाज तक सीमित रहने वाली सीमा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी पहचान बनाई बल्कि पशुपालन के जरिए आय का स्थायी साधन भी विकसित किया है। उनकी यह यात्रा आत्मनिर्भरता और मेहनत की मिसाल पेश करती है।
सीमा ने बताया कि उन्होंने दसवीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर रखी है। वर्ष 2022 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्हें नहीं पता था कि यह कदम उनके जीवन में इतना बड़ा बदलाव लेकर आएगा। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला बल्कि नई चीजें सीखने और अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर भी प्राप्त हुआ। इसी दौरान उन्होंने पशुपालन को अपने व्यवसाय के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। शुरुआत में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। समूह से मिली आर्थिक सहायता के जरिए उन्होंने पशु खरीदे और दूध उत्पादन का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम को बढ़ाया और दूध के साथ-साथ घी बनाकर भी बेचना शुरू कर दिया। आज उनका यह कार्य अच्छी आमदनी का जरिया बन चुका है जिससे वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। सीमा बताया कि पहले वह केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक ही सीमित थीं और आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर रहती थीं लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी सोच और आत्मविश्वास दोनों में बदलाव आया। अब वह खुद कमाई कर रही हैं बल्कि अपने फैसले भी खुद लेने लगी हैं।