अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। अपने ही शहर में आने-जाने के लिए टोल देने का विरोध तेज हो गया है। शहर के सामाजिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ ही आसपास के गांव के लोग भी इसके विरोध में एक हो गए हैं। दो निगम पार्षदों के समर्थन में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने रविवार को बैठक की। सभी ने कहा कि उन्हें एलिवेटिड हाईवे का उपयोग किए बिना ही टोल देना पड़ रहा है। पार्षदों और शहरवासियों ने इसके बाद ग्रामीण विधायक को ज्ञापन सौंपकर टोल बंद कराने की मांग की। ग्रामीण विधायक ने शहरवासियों की बैठक भूजल परिवहन मंत्री से कराने का आश्वासन दिया है। सामाजिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारियों ने टोल का खुलकर विरोध करने की चेतावनी दी है।
शहर के सामाजिक, धार्मिक और व्यापारी संगठनों के पदाधिकारी रविवार को जीटी रोड टोल के नजदीक स्थित ताऊ देवीलाल पार्क में एकजुट हुए। यहां पानीपत टोल फ्री को लेकर बैठक की। संगठनों के विरोध को पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह और भाजपा के वार्ड-3 पार्षद हरीश शर्मा ने भी अपना समर्थन दिया। कांग्रेस और दूसरे दलों के नेताओं ने भी अपना समर्थन दिया। शहरवासियों और आसपास के गांवों के लोगों ने टोल का विरोध करते हुए इसे बंद कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे अब पानीपत को टोल फ्री कराकर ही रहेंगे। इसके बाद सभी लोग एकजुट होकर पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा के सेक्टर-18 स्थित कार्यालय में पहुंचे। वहां पानीपत टोल फ्री कराने की मांग को लेकर अपना ज्ञापन सौंपा। इंसार बाजार के प्रधान गौरव लिखा, पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह व पार्षद हरीश शर्मा ने कहा कि जीटी रोड पर एलिवेटिड हाईवे बनने के बाद पानीपत को ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जीटी रोड पर हर समय जाम लगा रहता है। स्थानीय निवासियों को एलिवेटेड हाईवे का प्रयोग किए बिना ही टोल टैक्स देना पड़ रहा है। विदित है कि संगठनों के पदाधिकारी पिछले 20 दिनों से शहर के विभिन्न संगठनों व ग्राम पंचायतों का समर्थन ले रहे हैं। जिला बार एसोसिएशन ने भी पानीपत टोल फ्री को लेकर समर्थन दिया है।
इन क्षेत्रों के करीब 50 हजार लोग हो रहे प्रभावित
जीटी रोड स्थित टोल को लेकर सबसे ज्यादा प्रभावित पानीपत के लोग हैं। शहरवासियों को करनाल की तरफ निकलते ही टोल देना पड़ता है। टोल पार के हुडा सेक्टर-13-17, 18, 40, 41, एल्डीको, बाबरपुर मंडी, शिमला मौलाना, निजामपुर, गांजबड़, बड़ौली, महमूदपुर, काबड़ी समेत कई गांवों के लोगों को शहर में आने और जाने में टोल टैक्स देना पड़ता है।
कार्ड दस रुपये और बिना कार्ड तीस रुपये
जीटी रोड स्थित टोल प्लाजा पर पानीपत नंबर की गाड़ी के कार्ड बनवाने पड़ते हैं। उनको अप-डाउन के दस रुपये देने पड़ते हैं। पानीपत से बाहर के नंबर की गाड़ी चालक को अप-डाउन में 60 रुपये देने पड़ते हैं। इसके अलावा बड़ी गाडिय़ों का चार्ज सौ से दो सौ रुपये तक है। एक व्यक्ति को दिन में दो बार आने-जाने में पानीपत नंबर की गाड़ी के साथ 20 रुपये, जबकि बिना कार्ड की गाड़ी के साथ 120 रुपये देने पड़ते हैं।
इसलिए कर रहे विरोध
पानीपत अकेला ऐसा जिला है, जिसमें दो टोल पानीपत की सीमा में ही स्थापित हैं। इसके अलावा तीसरा टोल करनाल की तरफ चलते ही घरौंडा के पास है। जीटी रोड पर गन्नौर और मुरथल के बीच टोल स्थापित होते ही जिले के आसपास टोल की संख्या चार हो जाएगी। पानीपत से करनाल जाने के लिए एक व्यक्ति को गाड़ी में पानीपत में टोल देने के बाद घरौंडा में अप-डाउन का 170 रुपये का टोल देना पड़ता है। सेक्टर-18 या इस तरह के ग्रामीणों को इसराना या गोहाना जाने के लिए पहला टोल जीटी रोड और दूसरा टोल पानीपत-रोहतक हाईवे पर डाहर गांव में देना पड़ता है। यह अप-डाउन का 120 रुपये का टोल है। ऐसे में लोग लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं।
पांच अप्रैल को शहरवासियों ने शुरू किया था विरोध
शहर की कुछ सामाजिक, धार्मिक व व्यापारी संगठनों ने पानीपत को टोल फ्री कराने का फैसला लिया था। इसको लेकर सोशल मीडिया में व्हाट्स एप और फेसबुक पर अकाउंट बनाया था। इसमें टोल का विरोध करने का फैसला लिया गया। अमर उजाला माई सिटी ने शहरवासियों की इस शुरुआत को पांच अप्रैल के अंक में जीटी रोड को टोल फ्री करने की फिर उठी मांग, संघर्ष को लेकर सोशल मीडिया पर हो रहे हैं एकजुट। हैडिंग से समाचार भी प्रकाशित किया है।
पानीपत में 2008 में शुरू हुआ था टोल
जीटी रोड के ट्रैफिक दबाव को कम करने को लेकर शहर के हिस्से में दस किलोमीटर लंबा एलिवेटिड हाईवे बनाया गया था। इसकी शुरुआत 2008 में की थी। एलिवेटिड हाईवे कंपनी एलएनटी ने इसको लेकर करनाल की तरफ टोल स्थापित कर दिया था। प्रत्येक गाड़ी के अप-डाउन के 60 रुपये तय किए थे। स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया तो प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले का हल निकाला और शहर की गाड़ियों के कार्ड बनाकर दस रुपये अप-डाउन के तय किए गए। अब शहर करनाल की तरफ विकसित होने लगा है। ऐसे में शहरवासी इसको टोल फ्री कराने की मांग करने लगे हैं।
हुडा सेक्टरों को सबसे ज्यादा नुकसान
जीटी रोड स्थित टोल के चलते सबसे ज्यादा नुकसान हुडा सेक्टर-18 और 13/17 के लोगों को उठाना पड़ रहा है। कुछ ट्रक चालक और दूसरे हैवी व्हीकल टोल बचाने के चक्कर में सेक्टर की सड़कों से गुजरते हैं। इससे सेक्टरों की सड़क टूट जाती हैं। हुडा सेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन कई बार हैवी व्हीकलों की एंट्री पर रोक लगाने की मांग कर चुकी है। सेक्टर-17 निवासी भीम सिंह खैंची ने बताया कि सड़क बनने के कुछ माह बाद ही टूटनी शुरू हो जाती हैं।
जीटी रोड स्थित टोल के पहले से ही रेट कम है। शहरवासियों की तरफ से टोल फ्री करने की मांग उठी है। मैंने भूतल एवं परिवहन मंत्री से मिलवाने की बात कही है। इसमें सबसे ज्यादा मेरा ही हलका प्रभावित है। मैं हलकावासियों के साथ खड़ा हूं।
महिपाल ढांडा, विधायक, पानीपत ग्रामीण।