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Panipat News: बाल जाटान और खंडरा के सरपंच निलंबित

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सुरेंद्र राठी
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बाल जाटान और खंडरा के सरपंच निलंबित
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माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। ग्राम पंचायतों के सरकारी कोष का दुरुपयोग करने और नियमों को दरकिनार कर 225 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निजी बैंकों में जमा कराने के गंभीर मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मतलौडा खंड के गांव बाल जाटान के सरपंच सुरेंद्र राठी और खंडरा गांव की महिला सरपंच सोनिया देवी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबन अवधि के दौरान दोनों सरपंच ग्राम सभा की किसी भी बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे और पंचायत का कार्यभार बहुमत प्राप्त पंच को सौंपा जाएगा। इस मामले में लापरवाही और संलिप्तता के आरोप में संबंधित पंचायत सचिव को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
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आईओसीएल को जमीन बेचने से मिले थे 383.45 करोड़ रुपये
मामला इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) को बेची गई पंचायती जमीन के मुआवजे से जुड़ा है। दोनों पंचायतों ने करीब 180 एकड़ जमीन आईओसीएल को दी थी। इसके एवज में 383.45 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।
इसमें बाल जाटान की लगभग 124 एकड़ जमीन के बदले 277 करोड़ रुपये और खंडरा की करीब 56 एकड़ भूमि के बदले 106.44 करोड़ रुपये मिले थे। यह पूरी राशि शुरुआत में पंजाब नेशनल बैंक के बचत खातों में जमा हुई थी। इसके बाद नियमों का उल्लंघन करते हुए इस रकम का बड़ा हिस्सा निजी बैंकों व संस्थानों में सावधि जमा (एफडी) के रूप में ट्रांसफर कर दिया गया।

225 करोड़ रुपये निजी बैंकों में कराए एफडी
बाल जाटान पंचायत ने 264.96 करोड़ रुपये की 16 एफडी बनाई। जिनमें से 10 निजी बैंकों में थी और करीब 165 करोड़ रुपये चार निजी संस्थानों में रखे गए। इन पर 6.50 से 7.40 प्रतिशत तक ब्याज दर दर्ज है। इसी तरह खंडरा पंचायत ने 101.81 करोड़ रुपये की नौ एफडी में से करीब 60 करोड़ रुपये दो निजी बैंकों की पांच एफडी में लगा दिए।
इस प्रकार बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के दोनों पंचायतों की लगभग 225 करोड़ रुपये की राशि निजी क्षेत्र के बैंकों में पहुंचा दी गई। बाल जाटल के सरपंच सुरेंद्र राठी ने बताया कि गांव के विकास कोष के रख-रखाव में किसी बदनीयती से नियमों की अनदेखी नहीं की है। प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष स्पष्ट किया था। वे अपनी उच्चाधिकारियों के सामने रखेंगे।

खंडरा गांव की सरपंच सोनिया देवी नेबताया कि बैंक खाते को लेकर अपनाई प्रक्रिया विभागीय सलाह पर हुई थी। प्रशासन के नोटिस का जवाब दिया गया है। वे अपना स्पष्टीकरण उच्चाधिकारियों के समक्ष रखेंगे।वित्त विभाग के निर्देशों का हुआ उल्लंघन

प्रदेश में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े करीब 600 करोड़ रुपये के फ्रॉड प्रकरण के बाद वित्त विभाग ने 18 मई को सरकारी धन की एफडी को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। इसके तहत अधिकृत बैंकों से ब्याज दर के कोटेशन लेने, तुलनात्मक विवरण तैयार करने और सक्षम अधिकारी से प्रस्ताव मंजूर कराना अनिवार्य किया गया था।
इसके बावजूद दोनों पंचायतों ने बिना अनुमति निजी बैंकों में फंड जमा करा दिया। मामला संज्ञान में आने पर उपायुक्त ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर यह कार्रवाई की गई।

दो विभागीय अधिकारी भी सरकार के रडार पर
इस पूरे प्रकरण में केवल पंचायत प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं। पंचायत विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है और उन पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। शासन स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों अफसरों को चंडीगढ़ मुख्यालय तलब किया जा चुका है।
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वर्जन:

सरकारी धन के रख-रखाव में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता और नियमों की अवहेलना को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजी बैंकों में बिना अनुमति पंचायत फंड जमा कराने के मामले में दोषी पाए जाने पर दोनों सरपंचों को निलंबित कर दिया गया है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है और इसमें संलिप्त किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त।

सुरेंद्र राठी

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