इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में पानीपत नगर निगम को तगड़ा झटका लग सकता है। सर्वेक्षण में निर्धारित 18 पैमानों पर निगम खरा नहीं उतर पाया है। जबकि कागजों में निगम ने हर पैरामीटर पर अपना सौ प्रतिशत काम तक पूरा दिखा दिया है। केंद्र की सर्वे टीम इसका निरीक्षण कर चुकी है। इसके बाद केंद्र की रि- वेरिफिकेशन टीम भी इसकी जांच कर लौट चुकी है। माना जा रहा है कि अबकी बार निगम की रैंकिंग काफी गिर सकती है। दो माह बाद सर्वेक्षण के परिणाम सब सामने ला देंगे।
स्वच्छ सर्वेक्षण में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के काम को सौ प्रतिशत दिखाया गया है, जबकि आज भी शहर की कई कॉलोनियों और वार्डों में ये काम पूरा नहीं हो पाया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुविधा एप पर आने वाली शिकायतों का निपटारा करने में निगम पीछे रहा है। प्रदेेश भर में इस पोर्टल के जरिए 33 हजार शिकायतें आई हैं, इनमें से 3300 से भी ज्यादा शिकायतें अकेले पानीपत निगम की हैं।
गीला सूखा कूड़ा अलग करने के लिए कूड़ा उठान वाली गाड़ियों, बड़े डस्टबिन और डंपिंग स्टेशनों में कोई प्रावधान नहीं है। गाड़ियों में अलग-अलग खाने तक नहीं हैं। लोग भी गीला सूखा कूड़ा अलग करने के लिए जागरूक नहीं है। न ही किसी प्रकार को एजेंसी या निगम ने अभी तक कोई अभियान चलाया है। सर्वेक्षण में सबसे अहम बात गीले सूखे कूड़े को अलग करने की मानी जाती है।
स्वच्छ सर्वेक्षण के दौरान निगम क्षेत्र में हर व्यवसायिक जगह पर हर 50 मीटर की दूरी पर एक डस्टबिन और रिहायशी एरिया में हर 100 मीटर की दूरी पर एक डस्टबिन होना आवश्यक था। इस हिसाब से निगम एरिया में हजार डस्टबिन से ज्यादा लगाए जाने थे, लेकिन निगम ने केवल 50 से 100 डस्टबिन ही लगवाएं हैं, ये भी कहां लगे हैं, इसकी भी कोई जानकारी नहीं है।
पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में कम से कम तीन सब डंपिंग स्टेशन अनिवार्य हैं, पानीपत निगम की आबादी दस लाख से ज्यादा है, इसलिए 6 अनिवार्य हैं, निगम ने कागजों में भी 6 सब स्टेशन दिखाए हैं, लेकिन धरातल पर केवल एक डपिंग स्टेशन ही बना है जोकि सेक्टर 25 में है।
कूड़े को अलग करके इसके ट्रांसपोर्टेशन के लिए रूट मैप तो निर्धारित किए गए हैं। इनकी मॉनिटरिंग भी अनिवार्य है, लेकिन इसको अमल में कोई नहीं लाता है। लोगों को भी इसके बारे में जानकारी नहीं है कि उनके वार्ड या कॉलोनी की गाड़ी कहां है और कब आएगी, न ही वे इसे ट्रेस कर सकते हैं।
शहर की सफाई को लेकर पब्लिक और कमर्शियल एरिया में 24 घंटे में कम से कम दो बार सफाई होनी आवश्यक है, लेकिन निगम के कई ऐसे वार्ड हैं, जिनकी कई-कई कॉलोनियों में सिर्फ 5 से 7 सफाई कर्मचारी ही रखे गए हैं। यहां की सफाई का दिन में दो बार तो दूर की बात दो दिन में भी एक बार का नंबर नहीं आ पाता।
शहर से उठाए जाने वाले गीले और सूखे कूड़े का रोज निष्पादन होना अनिवार्य है, लेकिन अभी तक ये सुविधा पानीपत निगम के पास नहीं है। पहले कूड़ा उठाने के बाद सब स्टेशन में फिर यहां से निंबरी डंपिंग स्टेशन में और यहां निष्पादन में कई दिन का समय लग जाता है। अभी भी निंबरी डंपिंग स्टेशन में 5 लाख टन कूड़ा पड़ा है।
इसके अलावा साइंटिफिक लैंडफिल, सी एंड डी वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट, ब्लक वेस्ट जेनरेटर, आरडीएफ, वॉटर बॉडी में सॉलिड वेस्ट को जाने से रोकना, यूजर चार्ज, पैनाल्टी प्रोविजन, नोटिफिकेशन बायलॉज, सिटीजन ग्रीवेंस रिड्रेसल व मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तक शामिल हैं, जिनको निगम ने पूरा दिखाया है, लेकिन इनमें अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश है।