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दक्षिण अफ्रीका से आने वालों की होगी आरटीपीसीआर जांच

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पानीपत। दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन ने चिंता बढ़ा दी है। यह कोरोना का अब तक का सबसे अधिक म्यूटेशन करने वाला वेरिएंट माना जा रहा है। डॉक्टर इस वेरिएंट को बहुत खतरनाक बता रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय की ओर से सभी जिलों को एडवायजरी भी जारी कर दी गई है।
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दक्षिण अफ्रीका से आने वाले लोगों की डिटेल लेकर प्रशासन उनको ट्रेस करेगा। पुलिस उनको ढूंढकर सिविल अस्पताल में लेकर आएगी। यहां उनका आरटीपीसीआर टेस्ट होगा। अगर उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव मिलती है तो उनकी जीन सीक्वेंसिंग होगी। जिसके लिए सैंपल खानपुर मेडिकल कॉलेज या दिल्ली एम्स में भेजे जाएंगे। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले हर व्यक्ति को 10 दिन तक आइसोलेशन भी रखा जाएगा। एक्सपर्ट की ओर से डॉक्टरों व स्टाफ नर्सों के लिए इसी सप्ताह ट्रेनिंग सेशन भी होंगे। हालांकि पिछले 15 दिनों में पानीपत में दक्षिण अफ्रीका से कोई व्यक्ति नहीं लौटा है।
50 से अधिक म्यूटेशन कर चुका ओमिक्रॉन
ओमिक्रॉन का पहला मामला 24 नवंबर 2021 को साउथ अफ्रीका में मिला। ओमिक्रॉन बहुत तेजी से म्यूटेशन करने वाला वेरिएंट है। जो 50 से अधिक म्यूटेशन पहले ही कर चुका है। साथ ही इसके स्पाइक प्रोटीन में भी 30 से अधिक म्यूटेशन हो चुके हैं। स्पाइक प्रोटीन के जरिए ही वायरस इंसान की कोशिकाओं में प्रवेश करता है। ज्यादातर वैक्सीन का टॉरगेट भी स्पाइक प्रोटीन ही होता हैं। डेल्टा वेरिएंट में केवल दो ही म्यूटेशन हुए थे।
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पानीपत के लिए ये बन सकती है बड़ी समस्या
पानीपत के बाल जटान गांव बने 500 बेड के कोविड अस्पताल को बंद कर दिया गया है। यहां से स्वास्थ्य विभाग, बिजली निगम व अस्पताल बनाने वाली कंपनी ने अपना सामान भी उठा लिया है। यहां से डॉक्टरों को वापस बुला लिया गया है। अगर ओमिक्रॉन वेरिएंट का खतरा बढ़ा तो दोबारा जिले की स्थिति गंभीर हो सकती है।
इन लोगों को है ओमिक्रॉन से अधिक खतरा-
कोरोना के अन्य वेरिएंट की तरह ही ओमिक्रॉन से भी सबसे अधिक संक्रमण का खतरा उन लोगों को हैं, जिन्होंने अब तक कोरोना टीके की एक भी डोज नहीं लगवाई है।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है- सीएमओ
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले लोगों को ट्रेस कर उनके आरटीपीसी टेस्ट किए जाएंगे। उनको 10 दिन तक आइसोलेशन में भी रहना होगा। लोगों से अपील है कि मास्क का प्रयोग न छोड़ें, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें।
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डॉ. जितेंद्र कादियान, सिविल सर्जन
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