राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक 12 मार्च को पानीपत के समालखा में होगी। यह बैठक 12 साल बाद हरियाणा में होने जा रही है। इससे पहले 2010 में कुरुक्षेत्र में बैठक हुई थी। इसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत सहित देशभर से करीब 14 सौ कार्यकर्ता शामिल होंगे। भागवत का इस बार सबसे लंबा प्रवास हरियाणा में रहेगा। वे छह मार्च को यहां पहुंच जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की हर साल बैठक होती है। इसमें नूतन वर्ष में किए गए कार्यों और आगामी वर्ष के कार्यों पर चर्चा की जाती है। इस वर्ष की बैठक 12 से 14 मार्च को समालखा स्थित आरएसएस कार्यालय में होगी। प्रांत प्रचार प्रमुख हरियाणा राजेश कुमार ने बताया कि बैठक में 2022-2023 के संघ कार्य की समीक्षा और आगामी वर्ष (2023-2024) की संघ कार्य योजना पर चर्चा की जाएगी।
इसके अलावा कार्यकर्ता निर्माण व प्रशिक्षण, संघ शिक्षा वर्गों की योजना, शताब्दी विस्तार योजना व कार्य के सुदृढ़ीकरण और देश की वर्तमान स्थिति पर विचार व महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले विशेष रूप से पहुंचेंगे। सभी सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी, क्षेत्र व प्रांत कार्यकारिणी, संघ के निर्वाचित सभा के प्रतिनिधि, सभी विभाग प्रचारक और विविध संगठनों के निमंत्रित कार्यकर्ता भाग लेंगे। देशभर से लगभग 14सौ कार्यकर्ता बैठक में शामिल होंगे। 12 मार्च को तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन होगा। इसके बाद लगातार चलेगा। यह सम्मेलन आवासीय होगा।
आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना पर होगा काम
समालखा खंड के पट्टीकल्याणा गांव में सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र है। पिछले शनिवार को ही इसे मूर्त रूप मिला है। केंद्र के आसपास के सौ गांवों को गोद लेकर उनमें आत्मनिर्भर ग्राम विकास की परिकल्पना पर काम किया जाएगा। यहां कौशल विकास केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। इसके लिए श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के साथ समझौता पत्र किया गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नौ जून 2018 को केंद्र का शिलान्यास किया था। यह केंद्र 28 एकड़ में है। इसमें हर आयु वर्ग के लिए कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, जनहित के लिए चिकित्सालय, साधना के लिए पूजा गृह, ध्यान साधना केंद्र व मंदिर बनाया गया है। केंद्र में दो हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है।