पानीपत। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली औद्योगिक इकाइयों से जुर्माना नहीं वसूल पा रहा है। एनजीटी प्रदूषण को बढ़ावा देने वाले उद्योगों पर जुर्माना तय करती है लेकिन बोर्ड एनजीटी के आदेशों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। प्रदेश के लगभग 928 उद्योगों पर 230 करोड़ रुपये जुर्माना बकाया है। इसमें पानीपत की असंल टीडीआई समेत 18 उद्योग हैं। सबसे अधिक उद्योग इसमें गुरुग्राम व फरीदाबाद के हैं।
यह खुलासा पर्यावरण विद वरुण गुलाटी की आरटीआई से हुआ है। उन्होंने इस मामले की दोबारा फिर एनजीटी में शिकायत दी है। एनजीटी ने इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब तलब कर लिया है। अब इस मामले की आगामी सुनवाई 13 फरवरी 2025 को होगी।
पर्यावरण विद वरुण गुलाटी ने बताया कि वह पर्यावरण के लिए सालों से लड़ाई लड़ रहे हैं। एनजीटी खराब हो रहे पर्यावरण को लेकर गंभीर है। एनजीटी प्रदूषण के कारकों पर जुर्माना तय करती है।इसको वसूलने की जिम्मेदारी बोर्ड कीहोती है। उन्होंने 2023 व 2024 में उद्योगों से जुर्माना वसूलने संबंधी जानकारी मांगी थी। इसमें जानकारी मिली है कि पानीपत, सोनीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र , अंबाला, चरखीदादरी, सिरसा, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम फरीदाबाद, बहादुरगढ़ व पलवल के उद्योगों पर 230 करोड़ रुपये जुर्माना बकाया है । वह इसको देख हैरान हो गए। इसके बाद वे तुरंत एनजीटी पहुंचे। जहां उन्होंने इस बारे में एनजीटी को अवगत करवाया और इस पर कड़ा संज्ञान लेने की गुहार लगाई। एनजीटी ने इस पर तत्काल एक्शन लेते हुए बोर्ड के अलावा हरियाणा सरकार से भी जबाब तलब किया है। बोर्ड ने जुर्माना वसूलने के लिए कोई कड़ा कदम भी नहीं उठाया गया। इसकी सरकार के स्तर पर भी कोई सुध नहीं ली गई।