पानीपत। आरपीएफ ने बुधवार को रेलवे स्टेशन के आसपास पतंगबाजी करते हुए तीन-चार बच्चों को पकड़ा है। जिन्हें आरपीएफ टीम ने चेतावनी और समझाकर छोड़ दिया। मकर संक्रांति के अवसर पर बच्चे और युवाओं में पतंग उड़ाने का खास उत्साह होता है। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें नजर आती हैं लेकिन रेलवे ट्रैक और स्टेशन परिसर के आसपास पतंग उड़ाना न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
रेलवे ट्रैक, ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन और स्टेशन परिसर में पतंग उड़ाने से कई तरह के गंभीर हादसे हो सकते हैं। पतंग की डोर अगर बिजली की हाईटेंशन लाइन में फंस जाए तो करंट फैलने का खतरा रहता है, जिससे न केवल पतंग उड़ाने वाला व्यक्ति, बल्कि आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो सकता है। कई मामलों में ट्रेन की गति प्रभावित होने के साथ-साथ तकनीकी खराबी भी उत्पन्न हो जाती है। पतंग की डोर ट्रेन के इंजन या कोच से उलझने पर इमरजेंसी ब्रेक लग सकता है। खासकर मंझे वाली डोर और चाइनीज मंझे का उपयोग अत्यंत खतरनाक है। यह न केवल बिजली तारों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पक्षियों और इंसानों के लिए भी खतरनाक साबित हो चुका है। कई बार बच्चे अनजाने में रेलवे क्षेत्र में पतंग उड़ाने चले जाते हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इसी के लिए आरपीएफ ने यात्रियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे के आसपास के क्षेत्र में पतंगबाजी न करें, ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को समय रहते समझाएं और सुरक्षित स्थानों पर ही पतंग उड़ाने दें।
रेलवे अधिनियम के तहत रेलवे ट्रैक, स्टेशन परिसर या अन्य संरक्षित क्षेत्रों में पतंग उड़ाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसी गतिविधियों के लिए आरपीएफ लगातार गश्त कर रही है। तीन-चार बच्चे रेलवे ट्रैक के आसपास पतंग के साथ मिले जिन्हें समझाया गया।
-दिनेश कुमार मीना, थाना प्रभारी आरपीएफ।