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Panipat News: सड़क हादसे के शिकार लोगों को गोल्डन ऑवर में मिलेगा इलाज

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पानीपत। सड़क हादसे के शिकार लोगों को अब गोल्डन ऑवर में इलाज की सुविधा नजदीकी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी। इसके लिए आईआईटी मद्रास की मदद से जिले के सात ट्रामा सेंटर सुविधा वाले अस्पतालों को आपस में जोड़ा जा रहा है। निजी अस्पताल इलाज से इन्कार न करें इसके लिए सरकार घायल के इलाज के लिए डेढ़ लाख की सहायता उपलब्ध कराएगी। यदि किसी की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को दो लाख रुपये दिए जाएंगे। यह योजना मार्च माह से शुरू होगी।
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आईआईटी मद्रास ने गत वर्ष पानीपत जिले में सड़क हादसों में होने वाली मौतों के कारणों और उन स्थानों का अध्ययन किया था जहां हादसे अधिक होते हैं। इसमें पाया गया कि सड़क हादसों में घायल अधिकतर लोगों की मौत सिर में चोट लगने से होती है। ऐसे मरीजों को यदि गोल्डन ऑवर में ट्रामा सेंटर की सेवाएं मिल जाएं तो अधिकांश का जीवन बचाया जा सकता है। रिपोर्ट के बाद आईआईटी मद्रास व स्वास्थ्य विभाग ने हाथ मिलाया और जिले में उपलब्ध सात ऐसे अस्पतालों को आपस में जोड़ने का काम शुरू किया जहां ट्रामा सेंटर की सुविधा भी है।
ऐसे काम करेगी व्यवस्था
हादसे के शिकार व्यक्ति के बारे में स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सुविधा के लिए जब कोई जरूरतमंद 108 नंबर पर फोन करेगा तो एंबुलेंस उसे जिला अस्पताल की बजाए नजदीकी ट्रॉमा सेंटर सुविधा वाले अस्पताल में ले जाएगी।
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ये होता है गोल्डन ऑवर



किसी प्रकार के सड़क हादसे के पहले एक घंटे को गोल्डन ऑवर माना गया है। इस दौरान समुचित इलाज मिल जाने पर घायल व्यक्ति का जीवन बचने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।





बीते वर्ष सड़क हादसों में 308 लोगों की मौत
2024 में जिले में कुल 570 सड़क हादसे हुए, इनमें 308 लोगों की मौत हो गई जबकि 315 लोग गंभीर रूप से घायल हुए । हर माह 47 सड़क हादसों में 25 लोगों की मौत हुई है।
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जिले में सड़क हादसों के पांच हॉट स्पॉट
आईआईटी मद्रास ने पानीपत में अध्ययन में सड़क हादसों के पांच हॉट स्पॉट चिह्नित किए हैं। अध्ययन में पाया गया कि टोल प्लाजा क्रॉस करते ही अवैध कट है जहां वाहन चालक सेक्टर 18 की ओर टर्न लेते हैं, खादी आश्रम के सामने बना नया कट, चौटाला रोड जहां जीटी रोड पर मिलता है, नगीना हाइवे पुल यहां जीटी रोड पर सिवाह के पास मिलता है, सनौली नाका के पास सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं। यहां कई तकनीकि खामियां भी हैं।



कोट...
सड़क हादसे में घायल लोगों के लिए गोल्डन ऑवर सबसे महत्वपूर्ण होता है। अगर उस दौरान घायल को इलाज मिल जाए तो उसके बचने की संभावना बेहद अधिक होती है। घायल को जिला नागरिक अस्पताल में लाने में समय लगता है इसलिए उन्हें नजदीकी ट्रामा सुविधाओं वाले निजी अस्पताल में ले जाया जाना चाहिए। आईआईटी मद्रास की मदद से ट्रामा सेवा वाले अस्पतालों को एक साथ जोड़ा जा रहा है।
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-डॉ. जयंत आहूजा, जिला सिविल सर्जन
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