मृतक राजीव चावला का फाइल फोटो। क्षतिग्रस्त कार।
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पानीपत भाजपा जिला सचिव अनीता चावला के पति एवं आरएसएस के पूर्व प्रचार प्रमुख राजीव चावला की रविवार को अंबाला कैंट के पास दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। एयरबैग खुलने से जिला सचिव की जान बच गई। उन्हें मामूली चोटें आईं। दंपती रविवार सुबह चंडीगढ़ के लिए निकला था।
कोहरा होने के कारण अंबाला कैंट के पास उनकी कार एक कैंटर में टकरा गई। हादसे में कार पूरी तरह श्रतिग्रस्त हो गई। पोस्टमार्टम के बाद दोपहर करीब साढ़े तीन बजे शव पानीपत पहुंचा। उनके अंतिम संस्कार पर शहरी विधायक प्रमोद विज, भाजपा जिलाध्यक्ष अर्चना गुप्ता समेत कई नेता पहुंचे।
मूल रूप से सिरसा के कालांवली गांव निवासी प्रॉपर्टी डीलर राजीव चावला पिछले 40 वर्ष से पानीपत में सेक्टर-24 में रहते थे। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख रह चुके थे। वर्तमान में संघ के कार्यकर्ता थे। वर्ष 1992 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान अयोध्या में राजीव चावला की बाजू पर गोली लगी थी। उन्होंने कई दिनों तक अयोध्या में ही डेरा डाले रखा। वह वनवासी कल्याण आश्रम में भी कार्य करते थे।
राजीव चावला की पत्नी अनीता 10 साल से भाजपा से जुड़ीं हैं। वह पहले महिला मोर्चा की सदस्य थीं। पिछले करीब तीन साल से जिला सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा उनका साईं बाबा चौक पर सैलून है। वह अपनी पार्टी के कार्य में दिन रात लगी रहती हैं। उनके दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी वंशिका और छोटा बेटा वंश। बेटा डीएवी हुडा स्कूल में 12वीं का छात्र है।
होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर न्यूजीलैंड में नौकरी कर रही बेटी
राजीव चावला की बड़ी बेटी वंशिका ने नोएडा के एक कॉलेज से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया है। उन्होंने कोर्स के दौरान दुबई और न्यूजीलैंड में इंटर्नशिप की। अब 2022 में कोर्स पूरा होने के बाद वह न्यूजीलैंड की एक कंपनी में नौकरी कर रही हैं। राजीव चावला तीन माह पहले ही बेटी को एयरपोर्ट छोड़कर आए थे। पिता की मौत की सूचना परिजनों ने उसे दे दी है। वह दो से तीन दिन में भारत लौटेगी।
विलाप करते हुए पत्नी बोली : आप ने गाड़ी क्यों नहीं चलाई
पति-पत्नी दोनों रविवार को सुबह चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए थे। वह पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। पत्नी अनीता गाड़ी चला रही थीं। हादसे में पति की मौत हुई और एयरबैग खुलने से पत्नी बच गई। पति की मौत के बाद पत्नी विलाप कर कहती रहीं कि आपने गाड़ी मुझे क्यों दी। खुद क्यों नहीं चलाई। आपके बगैर हम कैसे रहेंगे।