पानीपत। नगर निगम आयुक्त ने निगम के कई अफसरों की जिम्मेदारी बदल दी हैं। इनमें तीन म्यूनिसिपल इंजीनियर को अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं और एक को रिलीव कर दिया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि अब कूड़ा पृथक्करण के 28 करोड़ के टेंडर की जिम्मेदारी निगम की सफाई शाखा की बजाए इंजीनियरिंग विंग के म्यूनिसिपल इंजीनियर अजीत गर्ग को दी गई है।
आदेशों में कूड़ा पृथक्करण के अलावा एमई अजीत गर्ग अपनी वर्तमान पोस्ट पर रहते हुए भी काम करेंगे। इनके अलावा एमई विनोद गोयल को अब सहायक नगर योजनाकार का चार्ज दिया गया है। एमई दीपक राणा को एनडीसी पोर्टल पर उप नगर योजानकार का काम दिया गया है। जबकि यहां से पहले ही ट्रांसफर किए गए एमई वीरेंद्र मलिक से अभी तक काम करवाया जा रहा था। उन्हें अब रिलीव कर दिया गया है। सहायक जिला न्यायवादी यानी एडीए शिव कुमार को मोबाइल टावर, कंपनियों द्वारा बिछाई जा रही अंडर ग्राउंड केबल समेत उनका पुराना काम करने की भी जिम्मेदारी दी गई है।
कूड़ा पृथक्करण के काम की नहीं हो पा रही थी पेमेंट
निगम आयुक्त द्वारा अफसरों की सीटें बदलने को लेकर निगम अधिकारी व जनप्रतिनिधि का मानना है कि कूड़ा पृथक्करण के टेंडर की 28 करोड़ की पेमेंट अभी तक निगम ने नहीं की थी। दरअसल इस टेंडर पर प्रदेश सरकार से लेकर जिला स्तर के नेताओं की भी पैनी नजर है। इस साइट पर जाकर कई बार मेयर और पार्षद पूरे काम का जायजा लेकर भ्रष्टाचार और गोलमाल तक के आरोप लगा चुके हैं। इस काम के लिए जिस भी अफसर को लगाया जाता था वह फाइल पर हस्ताक्षर करने से मना कर देता था।
अब इसकी जिम्मेदारी एमई अजीत गर्ग को इसलिए दी गई है ताकि उनसे पेमेंट की फाइल पर हस्ताक्षर करवा कर पेमेंट का भुगतान करवाया जा सके। दूसरी ओर चर्चा है कि ये काम एमई अजीत गर्ग की परेशानी बढ़ा सकता है। इससे वह खुद डरे हुए हैं। ऐसे में वह लंबी छुट्टी पर भी जा सकते हैं। जब आयुक्त एमई को कूड़ा पृथक्करण के काम की जिम्मेदारी सौंप रहे थे तो एमई ने आयुक्त से काफी गुजारिश तक की ये काम उन्हें न दिया जाए लेकिन उनकी फरियाद आयुक्त के कानों तक नहीं पहुंच सकी।
निगम के कई अफसरों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं ताकि निगम का काम प्रभावित न हो और सही ढंग से काम करवाया जा सके। -आरके सिंह, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।