पानीपत। यमुना को मैली होने से बचाने के लिए प्रशासन एक्शन में आ गया है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदार तय कर दी है। उसी क्षेत्र के कार्यकारी अभियंता नोडल अधिकारी होंगे। इसमें किसी प्रकार की कमी मिली तो नोडल अधिकारी पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। नोडल अधिकारियों को इन बिंदुओं को बंद करना या कराना होगा।
उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया ने सोमवार को एसटीपी से संबंधित बैठक जिला सचिवालय में ली। उन्होंने संबंधित विभागों के एक्सईएन को नोडल अधिकारी बनाया। इसके साथ कहा कि अगर उनका पानी दूषित होकर यमुना में गया तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। सभी विभाग मिलकर इसका हल निकालें। वे ट्रीट पानी को ही यमुना में जाने दें। बाकी पानी पर रोक लगाएं। अवैध रूप से किए गए कनेक्शन को बंद किया जाएं।
सीईटीपी और एसटीपी के बाद भी दूषित पानी
उपायुक्त ने दूषित पानी शोधन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शहर में सीटीईटीपी और एसटीपी लगे हैं। हर विभाग पानी शोधन का दावा कर रहा है। बावजूद इसके ड्रेन नंबर-1 और 2 में दूषित पानी जा रहा है। यह गंभीर विषय है। इसके लिए भविष्य में और अधिक सजग रहने की जरूरत है।
यमुना के साथ लगता है 40 किमी. क्षेत्र
जिले में यमुना राणा माजरा से हथवाला गांव तक करीब 40 किलोमीटर लंबाई में पड़ती है। जिले में मुख्य रूप से ड्रेन नंबर-एक और दो यमुना में सीधे मिलती हैं। इससे पहले शहर में ड्रेन नंबर-एक में जगह-जगह अवैध रूप से पानी छोड़ा जा रहा है। ड्रेन के पूरे पानी को शोधित नहीं किया जा रहा है। यह पानीपत एसटीपी के साथ बाईपास हाे रहा है। इस तरह ड्रेन नंबर-दो में जगह-जगह दूषित पानी डाला जा रहा है। सनौली और बापौली क्षेत्र में टैंकरों से साथ केमिकल युक्त पानी रात के अंधेरे में डाला जा रहा है। प्रशासन और पुलिस कई बार कार्रवाई कर चुका है। बावजूद इसके केमिकल युक्त पानी ड्रेन नंबर दो में डाला जा रहा है।