पानीपत। फर्जी फर्म बनाकर साइबर ठगी के मामले में तफ्तीश कर रही पुलिस के सामने मास्टरमाइंड तक पहुंचना बड़ी चुनौती है। अभी तक छह आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। जिनसे पूछताछ में मास्टरमाइंड के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। हैरत की बात तो यह है कि आरोपी एक दूसरे के बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं रखते। अब पुलिस एक-एक कड़ी को जोड़ने में लगी है।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने दो खातों में हुई 52 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से चार खाता धारक हैं। साथ ही दो आरोपी वह हैं जिन्होंने उनके खाते खुलवाने के लिए कागज तैयार कराए थे। खाता धारक केवल उन्हीं दो आरोपियों के बारे में जानते थे। उनके पैसे में कहां से पेमेंट और किसने निकाली इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। पुलिस अब गन्नौर के सुनील और शिमला के अंशुल से पूछताछ की रही है। उन्होंने यह आगे साइबर ठगों को बेचे थे। इस मामले में दो अन्य नाम सामने आए हैं। लेकिन उनके बारे में कोई ठोस जानकारी वह नहीं दे पा रहे हैं। पुलिस बैंक डिटेल के आधार पर आरोपियों की कुंडली खंगालने में जुटी हैं।
आरबीआई से मांगी खाता खोलने की प्रक्रिया की डिटेल
इस पूरे प्रकरण में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संलिप्त हैं। लेकिन बैंक अधिकारी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। जिस कारण पुलिस ने आरबीआई से खाता खुलवाने की गाइडलाइन और प्रक्रिया की डिटेल मांगी है। जिसके बाद बैंक के अधिकारियों से सख्ती से पूछताछ की जाएगी।