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रोडवेज का चक्का जाम, हजारों यात्री बेहाल

Thu, 14 Nov 2013 12:03 AM IST
पानीपत
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हरियाणा तालमेल कमेटी, सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा संयुक्त कर्मचारी महासंघ, हरियाणा मिनिस्टिरियल स्टाफ और रोडवेज कर्मचारी यूनियनों के आह्वान पर की गई दो दिवसीय हड़ताल का पानीपत में जोरदार असर रहा।
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हड़ताल के पहले दिन बुधवार को आलम यह था कि पानीपत डिपो की 124 बसाें में से एक भी बस स्टैंड नहीं चली। रोडवेज कर्मियों ने दिनभर बस स्टैंड परिसर पर प्रदर्शन किया और सरकार को खूब कोसा।

वहीं, बसों के लिए लोग दिनभर इधर से उधर भटकते रहे और उन्हें अपने-अपने गंतव्य तक जाने के लिए भारी परेशानी और मशक्कत करनी पड़ी।

इसके अलावा बिजली निगम, वन, सिंचाई, हुडा, आईटीआई, मंडी बोर्ड, मार्केट कमेटी, रोडवेज, पब्लिक हेल्थ, शिक्षा, पशुपालन, टूरिज्म, पीडब्ल्यूडी, बीएंडआर, राजस्व, नगर निगम, आंगनबाड़ी और आशा वर्कर समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल रहे और उन्होंने अपना-अपना कामकाज ठप रखा।
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हरियाणा रोडवेज के पानीपत डिपो में वर्तमान में 124 बसें हैं। रोडवेज के ड्यूटी इंस्पेक्टर शशी कपूर ने बताया कि ये बसें राज्य के विभिन्न शहरों समेत आसपास के राज्यों में जाती हैं।

 कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सभी बसें दिनभर स्टैंड परिसर में खड़ी रही। इससे पानीपत डिपो को करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

दो दिन तक हड़ताल के कारण सभी बसें यहीं खड़ी रहेंगी। इसके अलावा कटरा, अजमेर, बालाजी और रामपुर से ही पहुंची चार बसें यहां रुक गईं हैं।
 
बसों का चक्का जाम होने से यात्री बेहाल
चक्का जाम रहने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी हुई। ऐसे में यात्रियों को ट्रेनों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा। जीटी रोड पर शहर के दोनों छोर के बीच हर जगह यात्री खड़े रहे।

निजी वाहन चालकों इस दौरान खूब सवारियां ढोईं। ज्यादातर यात्रियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सफर किया। टैक्सियों और अन्य निजी वाहनों में यात्रियों के ठूंस-ठूंसकर ले जाया गया। वहीं, यात्रियों को भी मजबूरन वाहनों के छतों और बाहर लटककर यात्रा करनी पड़ी।

पुलिस दिखी बेबस
यात्रियों और निजी वाहन चालकों को समझाने और सख्ती बरतने में पुलिस प्रशासन बेबस नजर आया। शहर के चौक चौराहों पर खड़े पुलिस कर्मी सवारियों से भरे ओवर लोड वाहनों को देख कुछ नहीं कह पाए।

वाहन चालक धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रख कर सवारियां ढो रहे थे और पुलिस मूक दर्शक बनी रही।

बिजली सप्लाई रही ठप
कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बिजली निगम के सर्कल कार्यालय में भी कामकाज पूरी तरह से प्रभावित रहा। शहर के कई क्षेत्रों में बिजली की लाइनों में आई खराबी को ठीक करने के लिए कर्मचारी नहीं पहुंचे।

शहर की गंगाराम कॉलोनी, काबड़ी रोड और औद्योगिक क्षेत्र में कई जगहों पर बिजली गुल रही। इसके अलावा निगम में बिल और अन्य कई तरह के कार्य भी प्रभावित रहे।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और पेंशन को भटकते रहे लोग
नगर निगम कार्यालय में कामकाज प्रभावित होने से जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र और पेंशन के लिए पहुंचने वाले लोगों को खासी परेशानी हुई।

हड़ताल के बारे में जानकारी न होने के कारण काफी संख्या में लोग सुबह ही आफिस में आना शुरू हो गए, लेकिन लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा।

दोपहर बाद कार्यालय में सन्नाटा ही रहा। नगर निगम में हर रोज सैकडाें लोग अपने कार्यों के  लिए आते हैं। ऐसे में आफिस में आए लोगों को मायूसी हाथ लगी।

रेलवे स्टेशन पर मारामारी
हड़ताल के कारण हुए बसों का चक्का जाम के कारण यात्रियों ने ट्रेनों का सहारा लेना पड़ा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पानीपत रेलवे स्टेशन पर हर रोज करीब 35 हजार यात्री आवागमन करते हैं।

बुधवार को हड़ताल के कारण यात्रियों की संख्या बढ़कर करीब 75 हजार तक हो गई। हालांकि इससे रेलवे के रेवेन्यू में भी इजाफा हुआ। यात्रियों की भीड़ होने के कारण ट्रेेनों के ठहराव के समय को भी बढ़ाया गया।

टिकट खिड़की से लेकर पूछताछ खिड़की पर यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। कई यात्रियों को ट्रेनों में चढ़ने तक भी समय नहीं मिला और बहुत से यात्रियों को खिड़कियों में ही लटकना पड़ा।


हमें हड़ताल के बारे में पता नहीं था। सोनीपत अपने रिश्तेदार के यहां किसी जरूरी काम से जा रहे थे। बस स्टैंड पर आकर ही हड़ताल के बारे मेें पता चला। बस नहीं चलने के कारण वापस लौटना पड़ेगा।
-कमलेश, यात्री
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जरूरी काम से दिल्ली जाना था। बसें नहीं चल रही हैं। ऐसे में दिल्ली तक अन्य निजी वाहन का भी सहारा नहीं लिया जा सकता। घर लौटना ही उचित रहेगा।
-रेनू, यात्री

बसें नहीं चलने से खासी परेशानी हो रही है। पुरुष यात्री तो निजी वाहनोें में लटक कर भी जा सकते हैं। युवतियों और महिलाओं को ज्यादा परेशानी पेश आ रही है।
मोनिका, यात्री

सिरसा जाना था। सुबह ही बस स्टैंड पर आकर देखा तो कोई बस चलने के तैयार नहीं थी। वहां तक निजी वाहन भी नहीं जाते। अब तो घर ही लौटना पड़ेगा।
-कुलदीप, यात्री

चंडीगढ़ में अपने रिश्तेदार के पास जाना है। बस नहीं चलने से परेशानी हो रही है। ट्रेन से ही जाना पड़ेगा।  
-सतीश कुमार, यात्री

हड़ताल के बारे में पता तो था, लेकिन यह नहीं सोचा था कि बिल्कुल ही चक्का जाम रहेगा। मेरठ के लिए अन्य निजी वाहन भी जाते। अब दो दिन बाद ही जाना हो जाएगा।
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डॉ. नरेश राठी, यात्री
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