पानीपत। भागवत प्रवक्ता बाल व्यास बृज रसिका गोपश्वरी देवी ने कहा कि श्रीराम के सिमरण मात्र से ही जीव के सब दुख दूर हो जाते हैं। मनुष्य को जीवन में प्रभु का सिमरण जरूरी करना चाहिए।
वे वीरवार को श्रीराम मंदिर वार्ड-सात में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में अपने प्रवचनों की अमृत वर्षा कर रही थी। उन्होंने भागवत कथा सप्ताह के चौथे दिन भागवत प्रवक्ता बाल व्यास बृज रसिका गोपश्वरी देवी ने प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार, श्रीराम जन्म, श्री कृष्ण जन्म के अंतर्गत श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि प्रहलाद महाराज ने भगवान को खंभे में प्रकट किया और भगवान नरसिंह न हिरण्य कश्यप को भी मुक्ति दी और कहा प्रहलाद जी महाराज उठते-बैठते, खाते-पीते, सोते-जागते केवल भगवान का नाम लेते थे। इतनी निश्चल भक्ति प्रहलाद महाराज की थी। प्रहलाद जैसा परम भक्त शायद ही कोई और होगा, जिसे कण-कण में हर सांस में सिर्फ हरि ही दिखाई देता था। बृज रसिका ने आगे कथा का वर्णन करते हुए कहा कि श्री हरि के चरण कमलों की सेवा से नित्यसिद्ध भगवान मधुसूदन के चरण कमलों में उत्कट प्रेम और आनंद की वृद्धि होती है जो आवागमन की यंत्रणा का नाश कर देती है। महात्मा लोग भगवत्प्राप्ति के लिए साक्षात मार्ग ही होते हैं। उनके यहां सर्वदा देवों के देव श्री हरि के गुणों का गान होता रहता है अल्प पुण्य पुरुष को उनकी सेवा का अवसर मिलना अत्यंत कठिन है। परंतु कलियुग में सत्संग एवं सिमरण के माध्यम से आप श्री हरि को प्राप्त कर सकते हो।
मंच संचालन पं. सत्यनारायण शर्मा ने किया एवं हरीश चुघ ने भजन लल्ला की सुन के मैं आई, यशोदा मैया दे दो बधाई, दिन है सुहाना कन्हैया जी का आना, गाओ मुबारक गीत की प्रस्तुति देकर भक्तों को भक्तिरस में झूमने को मजबूर कर दिया। इससे पूर्व आज की कथा में मुख्यातिथि कृष्ण लाल जुनेजा ने दीप प्रज्जवलित कर कथा का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तम चंद, हनुमान प्रसाद शुक्ल, रमेश शास्त्री, अजय शास्त्री, सोहन लाल रेवड़ी, विनय कुमार झांब, वेद बांगा, चंद्रभान वर्मा, अनिल शर्मा, भीम सिंह, अशोक कुमार दीवान, खुशहाल दिवान व बाला देवी मौजूद रहे।