1121 किस्म की कटाई शुरू, नमी से दाना काला पड़ने और अंकुरण का खतरा
तेज हवा से खेतों में बिछी फसल, प्रति एकड़ पैदावार घटने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। बीते दिनों हुई बारिश और तेज हवा ने बासमती धान की फसल पर संकट खड़ा कर दिया है। जिले के कुछ क्षेत्रों में खेतों में बासमती की 1121 किस्म की कटाई शुरू हो चुकी है, लेकिन बारिश के कारण फसल में बढ़ी नमी से दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। दाना काला पड़ने, अंकुरण होने और चमक फीकी पड़ने से किसानों को बाजार में उचित भाव मिलने में परेशानी हो सकती है। वहीं, तेज हवा के कारण खेतों में गिरी फसल से प्रति एकड़ उत्पादन में भी कमी आने की आशंका है।
जिले में करीब 80 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। इसमें 50 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बासमती श्रेणी की किस्में उगाई जाती हैं। बासमती धान की गुणवत्ता उसके दाने की लंबाई, चमक और सुगंध पर निर्भर करती है। ऐसे में कटाई के समय मौसम की प्रतिकूलता किसानों की चिंता बढ़ा रही है। खेतों में गिरी फसल की कटाई और उसे सुखाने में भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। यदि कटाई के बाद धान को पर्याप्त तरीके से नहीं सुखाया गया तो नमी के कारण गुणवत्ता और भंडारण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
खेतों में गिरी फसल से बढ़ी चिंता
तेज हवा और बारिश से खेतों में धान की फसल गिर गई है। इससे कटाई में परेशानी बढ़ने के साथ उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। किसान रामफल जागलान ने बताया कि बारिश और तेज हवा से खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। फसल गिरने से कटाई में दिक्कत आ रही है और दाने की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बनी हुई है। किसान जितेंद्र कुमार ने बताया कि बासमती में अच्छी गुणवत्ता मिलने पर ही बेहतर भाव की उम्मीद रहती है। बारिश के बाद दाने की चमक और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि फसल में नमी की स्थिति देखकर ही कटाई करें। कटाई के बाद धान को अच्छी तरह सुखाएं और ढुलाई के दौरान उसे बारिश व नमी से बचाकर रखें, ताकि गुणवत्ता खराब न हो।
किसान इन बातों का रखें ध्यान
फसल में नमी अधिक होने पर कटाई से बचें।
कटाई के बाद धान को अच्छी तरह सुखाएं।
गीले धान को ढेर लगाकर लंबे समय तक न रखें।
ढुलाई और भंडारण के दौरान बारिश से बचाव करें।
मंडी में ले जाने से पहले दाने की गुणवत्ता और नमी की जांच करें।
वर्जन
बारिश के बाद किसानों को कटाई में जल्दबाजी करने के बजाय फसल की नमी का ध्यान रखना चाहिए। ज्यादा नमी रहने पर दाना फीका पड़ सकता है। कटाई के बाद धान को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण या मंडी में ले जाना चाहिए। खेतों में गिरी फसल को संभालने और ढुलाई के दौरान सावधानी बरतने से नुकसान कम किया जा सकता है।
डॉ. देवेंद्र कुहाड़, उपमंडल अधिकारी, कृषि विभाग।
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