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छह माह में हुए 60 हादसे, लोग नहीं ले रहे सबक

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पानीपत। चलती ट्रेन के सामने ट्रैक पर खड़े लोग । - फोटो : panipat
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रेलवे ट्रैक एक ऐसी जगह है, जहां पर अगर आपने लापरवाही बरती तो इसका बदला आप को अपनी जान देकर चुकाना पड़ सकता है। आए दिन रेलवे ट्रैक पर कोई न कोई हादसा होता ही रहता है। वैसे तो इन हादसों की कई वजह सामने आई हैं, लेकिन सबसे बड़ी वजह लोगों में जागरूकता की कमी है। पिछले 6 महीने के दौरान रेलवे ट्रैक पर करीब 60 हादसे हो चुके हैं। वहीं एक साल में इनका आंकड़ा करीब पौने दो सौ का है। पिछले एक साल में सौ से ज्यादा लापरवाही से लाइन पार करते हुए लोगों के चालान काटे गए जो पिछले 6 महीने में 70 चालान हो चुके हैं। इसके बाद भी लोग लापरवाही का परिचय देते हैं और हादसों का शिकार हो रहे हैं।
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हादसों का शिकार हो चुके अधिकतर लोगों ने अपनी जान गंवाई हैं, वहीं जो बचे हैं उनकी हालत अत्यंत दयनीय है। यहां पर हुए हादसों में आमतौर पर देखा गया है कि इनका मुख्य कारण कानों में फोन की लीड, सेल्फी, लापरवाही या नशा मिला है। दूसरी तरफ रेलवे पुलिस लोगों को जागरूक करने के कार्यक्रम तक आयोजित कर चुकी है, लेकिन लोगों की लापरवाही उनकी जान पर भारी पड़ रही है।
ऐसे हो चुके हैं हादसे : पिछले दिनों रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेते समय ट्रेन की चपेट में आने से एक साथ तीन युवाओं की जान गई थी। लेकिन लोग आज भी इनसे सबक नहीं ले पाए और सेल्फी दौर आज भी चालू है। कानों में लीड लगाकर ट्रैक पार करते समय कई हादसे हो चुके हैं, इनमें लोगों की जाने जा चुकी है, लेकिन आज भी लोग लापरवाही बरतते हुए कानों में लीड लगाए घूमते रहते हैं। इससे ट्रेन की आने जाने की आवाज या उसका सायरन तो सुनता ही नहीं। साथ में अगर कोई अन्य उन्हें आवाज दे तो वो भी सुनाई नहीं देता। यह भी हादसों की मुख्य वजह से में एक है। लापरवाही से लोग रोजाना ट्रेन आने से पहले ही प्लेटफार्म के दूसरी तरफ ट्रैक पर खड़े हो जाते हैं। जल्दबाजी में चलती ट्रेन से उतरते व चढ़ते हैं, जो हादसों का कारण बन जाता है। हाल ही में एक मूूक बधिर लड़के के साथ हुए हादसे में उसका एक पैर ट्रेन की चपेट में आ गया था। नशा भी इन हादसों की एक मुख्य वजह पाया गया है। इस प्रकार के केसों में लोग अत्यधिक नशे में ट्रैक पर चलने या पार करने की कोशिश में चोटिल हो जाते हैं। वहीं कुछ लोग रेलवे ट्रैक के साथ बैठकर नशा करते हैं। जो उनके लिए घातक साबित हो सकता है।
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ट्रेन की चपेट में आने वाले बचते हैं कम : रेलवे पुलिस और सामान्य अस्पताल के चिकित्सक बताते हैं कि रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने वाले कम ही ऐसे लोग हैं, जो बच पाते हैं। ट्रेन की चपेट में आने से लोग भयकर रूप से घायल हो जाते हैं। ट्रेन के साथ टक्कर उनके शरीर को तोड़ देती है। अब तक सभी संसाधनों से हुए हादसों में सबसे खतरनाक भूमिका ट्रेन की चपेट को दिया गया है। इसके बाद भी लोग लापरवाही बरतते हुए ट्रेनों के सामने से ही ट्रैक पार कर जाते हैं।
पकड़े जाने पर करते हैं चालान : आरपीएफ और जीआरपी कई बार इस प्रकार के अभियान चलाकर लापरवाही से ट्रेक पार करने वालों को पकड़कर उनके चालान तक कर चुकी है। वहीं जीआरपी ट्रेन में सुरक्षित यात्रा व नशे को लेकर कई बार जागरूकता अभियान चला चुकी है। इसके बावजूद भी लोगों का इस पर कोई असर नहीं है। कहीं न कहीं इन हादसों की मुख्य वजह जागरूकता ही पाई गई है।
लोग कानों में लीड लगाकर, चलती ट्रेनों में उतरते चढ़ते समय या फिर नशे की हालत में ज्यादातर दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। पिछले 6 माह में करीब 60 हादसे हो चुके हैं, इनमें ज्यादातर लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। ट्रैक पर गलती के लिए कोई माफी नहीं है। लोगों को जागरूक करने के लिए कई अभियान चलाए जा चुके हैं। चालान तक काटे जाते हैं, इसके बाद भी लोग दुर्घटनाओं से सबक नहीं ले रहे और दुर्घटनाओं के शिकार हो जाते हैं।
मंजीत सिंह, एसएचओ, जीआरपी।
गलत तरीके से लाइन पार करने वाले, ट्रेन में लापरवाही से उतरने चढ़ने वालों के सामान्य रूप से चालान किए जाते रहे हैं। पिछले डेढ साल में करीबन पौने दो सौ हादसे हो चुके है, इससे ज्यादा हम लापरवाही से ट्रैक पार करने वालों के चालान काट चुके हैं। पुलिस समय समय पर जागरूकता अभियान भी चलाती रही है। पोस्टर व पर्चे तक छपवा कर चिपकवाए गए हैं, इसके बाद भी लोग लापरवाही के चलते हादसों का शिकार हो रहे हैं।
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राजेंद्र हुड्डा, एसएचओ, आरपीएफ।
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