नगर निगम में एक बार फिर लाखों रुपये का गोलमाल सामने आया है। इस बार फिर से पहले की तरह निगम कर्मचारियों ने लाखों रुपये के बिल को 80 प्रतिशत तक कम कर कुछ हजार में ही सेटल कर दिया। इसकी मेयर को भनक लगने के बाद से प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में हड़कंप मच गया। वहीं, निगम कर्मचारी पूरा दिन अपनी सफाई देने में लगे रहे। उन्होंने इस घटना को महज एक क्लरिकल मिस्टेक बताया। वहीं, कर्मचारियों से जब उपभोक्ता के बिल की रसीद मंगवाई गई तो उपभोक्ता ने ये तक कह दिया कि उन्होंने अपना बिल भरा ही नहीं। वहीं, मेयर ने इसकी जांच के लिए आयुक्त और विजिलेंस तक को पत्राचार पहले से किया हुआ है। दूसरी तरफ मेयर की सिफारिश पर प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के जोगिंद्र को काम से मुक्त कर दिया गया है, उनका चार्ज क्लर्क उपनेश को ही दिया गया है। निगम आयुक्त के मंगलवार को ज्वाइन के बाद जोगिंद्र को सस्पेंड किया जा सकता है।
इससे पहले भी 6 फरवरी को मेयर अवनीत कौर और पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह इसी तरह के फर्जीवाड़े का खुद खुलासा कर चुके हैं। उन्होंने खुद भी माना है कि कुछ दलालों की निगम अधिकारियों के साथ जबरदस्त सेटिंग हैं। वे लाखों रुपये के बिल को कुछ हजारों में ही सेटल करवा देते हैं। पिछली दफा भी कई लाखों रुपये के बिलों को सबूतों समेत पेश किया गया था। इस बार भी उन्होंने पूरे मामले की जांच पड़ताल के बाद जानकारी देने का आश्वासन दिया है। वहीं, दलालों के माध्यम से रिश्वत लेकर मोटे बिलों को हजारों रुपये की रिश्वत लेकर निगम अधिकारी और कर्मचारी बिलों को सेटल करवाने का काम करते आ रहे हैं। इस बार प्रॉपर्टी टैक्स के कर्मचारियों ने करीब ढाई लाख के बिल को करीब 45 हजार तो दूसरे करीब 85 हजार के बिल को महज 15 हजार में सेटल कर दिया है।
रिकार्ड नहीं, निगम के लिए चुनौती
हैरानी की बात तो ये है कि इस गड़बड़झाले को किसी भी तरफ पकड़ा भी नहीं जा सकता। इसका बड़ा कारण ये भी है कि निगम टैक्स ब्रांच शाखा में निगम के अंतर्गत आने वाली सभी प्रॉपर्टी का रिकार्ड तक नहीं है। किस प्रॉपर्टी पर कितना बकाया है और किसने पहले कितना बिल जमा किया है या नहीं इसका मालूम करना निगम के लिए चुनौती बन सकती है। वहीं, जिन उपभोक्ताओं ने दलालों व निगम कर्मचारियों को रिश्वत देकर बिलों को कम करवाने का काम किया है वे इसका खुलासा भी नहीं कर सकते, इससे उन्हीं को नुकसान होना भी स्वाभाविक है।
दलालों की लड़ाई से खुले राज
दोनों बार प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में इनका गोलमाल महज दलालों की लड़ाई से सामने आ पाया है। एक दलाल ने जब प्रॉपर्टी टैक्स को कम पैसों में सेटल करवाने की जिम्मेदारी ली तो दूसरे दलाल ने उसके कस्टमर को हॉयर करने पर इसकी शिकायत लगा दी। जब मामले का पर्दाफाश हुआ तो दूसरे दलाल ने पहले वाले दलाल की शिकायत कर दी। इसी कारण प्रॉपर्टी टैक्स में लाखों के बिल हजारों में सेटल किए जाते रहे हैं।
जोगिंद्र आज हो सकते हैं सस्पेंड, उपनेश को दिया अतिरिक्त काम
प्रॉपर्टी टैक्स के लाखों रुपये के बिल को हजारों में करवाने वाले मामले में टैक्स ब्रांच के जोगिंद्र का नाम सामने आया था, जिसकी मेयर ने खुद जांच कर मामले का खुलासा किया था। आयुक्त की गैर मौजूदगी मेेें उन्हें सस्पेंड नहीं किया जा सका, इसलिए मेयर की सिफारिश पर उन्हें काम से फ्री कर दिया गया है। उनके काम को शाखा के दूसरे कर्मचारी उपनेश को दिया गया है। मेयर का कहना है कि मंगलवार को आयुक्त के दोबारा ज्वाइन होने के बाद उन्हें सस्पेंड किया जाएगा।
मामला संज्ञान में है। इसके बारे में पहले भी आयुक्त को पत्राचार किया जा चुका है। इसकी निदेशालय को शिकायत कर विजिलेंस जांच के बारे में भी लिखा जा चुका है। सोमवार को सामने आए मामले की भी जांच की जाएगी, इसी के आधार पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-अवनीत कौर, मेयर, नगर निगम, पानीपत।