संवाद न्यूज एजेंसी
इसराना। इसराना क्षेत्र में बेसहारा गोवंश की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। एक ओर सरकार गोशालाओं को लाखों रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में गोवंश सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भटकते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि कई गोवंश कूड़ा-कचरा और पॉलिथिन खाने को मजबूर हैं।
भीषण गर्मी के बीच उन्हें पर्याप्त चारा और पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने इसराना में नई गौशाला के निर्माण की मांग उठाई है। ग्रामीण कृष्ण आर्य, मंजीत, देव, कुलदीप, विजय, चरण सिंह, राज सिंह, राजेश और नीरज ने बताया कि इसराना और आसपास के क्षेत्रों में कई गोशालाएं संचालित हैं, लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर बेसहारा गोवंश की संख्या कम नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि गांवों और कस्बों में जगह-जगह गोवंश कूड़े के ढेरों में भोजन तलाशते दिखाई देते हैं। कई बार पॉलिथिन और अन्य हानिकारक वस्तुएं खाने से गोवंश बीमार हो जाते हैं। वहीं, सड़कों पर बैठे रहने के कारण यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
गोसेवा परमो धर्म ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष जितेंद्र आर्य ने बताया कि इसराना में बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए करीब आठ माह पहले पंचायत से गौशाला निर्माण हेतु भूमि की मांग की गई थी। इससे पूर्व राज्यसभा सांसद संजय भाटिया से भी गोशाला निर्माण की मांग की गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
गोसेवा इसराना के ब्लॉक प्रधान संदीप डोगर ने प्रशासन से गोशालाओं की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कराने और यह सुनिश्चित करने की मांग की कि सरकार से मिलने वाली सहायता राशि का उपयोग गोवंश के हित में प्रभावी ढंग से किया जाए। उन्होंने सड़कों पर घूम रहे गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, उनके लिए चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने तथा सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।