पानीपत। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। इन्हीं समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर रही हैं। इसी कड़ी में खोजकीपुर गांव की रहने वाली नीता देवी भी ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं जिन्होंने संघर्षों के बीच आगे बढ़ते हुए आत्मनिर्भर बनी है। कभी मनरेगा में मजदूरी कर परिवार का गुजारा करने वाली नीता आज पशुपालन से अपनी आय बढ़ा रही हैं।
नीता ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह मनरेगा में मजदूरी करती थीं। रोजाना मेहनत करने के बावजूद आमदनी सीमित होने के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था। इसी दौरान गांव की कुछ महिलाओं ने उन्हें स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी लेकिन अन्य महिलाओं के समझाने पर उन्होंने करीब तीन साल पहले स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ले ली।
समूह से जुड़ने के बाद उनको बचत करने और छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने की जानकारी मिली। समूह की बैठकों में उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद उन्होंने पशुपालन का काम शुरू करने का फैसला लिया। शुरुआत में उन्होंने एक भैंस लेकर दूध का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम आगे बढ़ने लगा। आज पशुपालन उनके परिवार की आय का मुख्य साधन बन चुका है। इससे न केवल घर की आर्थिक ठीक हुई, बल्कि अब उन्हें कही बाहर जाकर काम करने की जरूरत भी नहीं है। वह रोजाना 300 रुपये तक का दूध बेचती हैं। कभी-कभी कम ज्यादा भी हो जाते हैं। मनरेगा में काम करने वाली महिलाओं को वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के फायदे बताती हैं।