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Panipat News: एंबुलेंस की देरी से गर्भवतियों की टूट रही सांस

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पानीपत। एंबुलेंस के समय पर न मिलने से गर्भवतियों और उनके परिवार की आस टूट रही हैं। हर माह औसतन 10-12 महिलाओं की डिलीवरी ऑटो और निजी कारों में हो रही है।
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वीरवार को एंबुलेंस की दो घंटे की देरी से पहुंचने पर जच्चा-बच्चा की जान चली गई। जिससे परिवार की खुशियां मातम में बदल गई। इस तरह के मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग समय पर एंबुलेंस पहुंचने और जच्चा-बच्चों काे बचाने के पूरे प्रयास करने का भी दावा कर रहा है।सीएमओ ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मंगवाई है।
स्वास्थ्य विभाग गर्भवतियों और नवजात की मृत्युदर को रोकने के लिए संस्थागत डिलीवरी पर जोर दे रहा है। जिला नागरिक अस्पताल के बाद समालखा सिविल अस्पताल और खोतपुरा सीएचसी में सिजेरियन डिलीवरी शुरू की हैं।
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खोतपुरा जिले की इकलौती सीएचसी है जहां सिजेरियन डिलीवरी की जा रही हैं। वहीं हर सीएचसी और पीएचसी में महिलाओं की सामान्य डिलीवरी पर जोर दिया जा रहा है। गर्भवतियों को लाने और बाद में घर भी छोड़ा जा रहा है। विभाग ने इसके लिए एंबुलेंस लगा रखी हैं।
अब एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं। इसका खामियाजा गर्भवतियों या नवजात को जान देकर चुकाना पड़ रहा है। या फिर ऑटो या गाड़ी में डिलीवरी करानी पड़ती हैं। स्वास्थ्य विभाग भी कोई सख्त कार्रवाई करने की बजाय इनको बचाने में लगा रहता है। ऐसे में इस तरह के मामले पिछले दिनों से लगातार बढ़ रहे हैं।
72 की जरूरत लेकिन 36 ही चालक : स्वास्थ्य विभाग में एंबुलेंस की 24 घंटे सेवा देने के लिए 72 चालकों की जरूरत है लेकिन विभाग में केवल 69 पद ही हैं उनमें से भी 33 पद खाली पड़े हैं। हाल में केवल 36 एंबुलेंस चालक ही हैं। चालकों की कमी का खामियाजा भी लोगों को चुकाना पड़ रहा है।
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