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कृषि कानूनों के विरोध में किसान ने साढ़े चार एकड़ गेहूं की फसल पर चलाया ट्रैक्टर

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pradarsan - फोटो : Panipat
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तीनों कृषि कानूनों के विरोध में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को किसान उजाड़ रहे हैं। जींद, रोहतक, सोनीपत और अंबाला के बाद अब बुधवार को पानीपत के इसराना हलके में भी एक किसान ने कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने पर सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। इस दौरान पर किसानों ने खेत में खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की है।
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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर दमनकारी दिवस पर बुधवार को इसराना के किसान नरेश जागलान ने अपनी साढ़े चार एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चलाकर रौंद दिया। किसान ने अपनी सारी फसल बर्बाद कर दी। किसान नरेश जागलान अपना ट्रैक्टर लेकर खेतों में पहुंच गया। जहां ट्रैक्टर के पीछे हैरो को जोड़ा और खेतों में ट्रैक्टर दौड़ा दिया। इस दौरान कुछ किसानों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन नरेश जागलान ने विरोध स्वरूप अपनी फसल को बर्बाद नहीं करने से इंकार कर दिया। कुछ ही देर में अपनी सारी फसल को उजाड़ दिया। इसके बाद उनके साथ खेत में अन्य किसान भी आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
अपनी फसल को उजाड़ने वाले किसान नरेश जागलान ने कहा कि तीन माह से किसान दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। करीब ढाई सौ से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं, लेकिन सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने को तैयार नहीं है। अब उनके पास फसल को बर्बाद करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है।
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इस मौके पर खेत में पहुंचे किसान प्रदीप जागलान, सुंदर सिंह, नीरज जागलान, शमशेर, चरण सिंह और राजा ने कहा कि किसान धरती का सीना चीर कर अनाज उगाता है, सबका पेट भरता है। हर कंपनी अपने उत्पाद की कीमत तय करती है, लेकिन किसान की फसल की कीमत वे लोग तय करते हैं, जिन्हें कृषि में लगने वाली लागत तक का ज्ञान नहीं है। किसान को उसकी फसल का भाव नहीं मिलता है। ये तीनों कानून किसान को बर्बाद करने वाले हैं।
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किसानों ने कहा कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते हैं, किसान अपनी फसल सरकार को नहीं बेचेगा। जरूरत पड़ी अपनी फसल को आग लगा देंगे।
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