इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने मिक्सोपैथी के विरोध में बुधवार को लघु सचिवालय के सामने फ्लाईओवर के नीचे भूख हड़ताल पर बैठकर विरोध प्रकट किया। भूख हड़ताल में आईएमए के 60 डॉक्टर शामिल रहे। निजी डॉक्टरों ने तीन घंटे अपने अस्पतालों में ओपीडी भी सस्पेंड रखी। डॉक्टरों ने मिक्सोपैथी के विरोध में डीसी धर्मेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा है। निजी अस्पताल में ओपीडी बंद रहने से सिविल अस्पताल में मरीजें की भीड़ जुट गई। निजी अस्पतालों में इलाज ना मिलने पर लगभग 5 हजार मरीजों को घर लौटना पड़ा। हालांकि काफी अस्पतालों में दो घंटे के बाद ही ओपीडी शुरू हो गई थी।
आईएमए ने ज्ञापन में लिखा कि 20 नवंबर को सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन ने एक नोटिफिकेशन जारी किया। ये नोटिफिकेशन पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई करने वाले आयुर्वेदिक डॉक्टरों को 58 तरह की सर्जरी करने की मंजूरी देता है। ये गलत है।
आईएमए के प्रधान डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि इससे खिचड़ी मेडिकल सिस्टम बन जाएगा, जो हाइब्रिड डॉक्टर पैदा करेगा। आईएमए का कहना है कि अगर इस तरह से शॉर्टकट अपनाए जाएंगे तो फिर नीट का क्या मतलब रह जाएगा। हम इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। अगर सरकार ने जल्द उनकी मांगे नहीं मानी तो आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर होगा। आपातकाल सेवाओं को भी बंद किया जा सकता है। इसलिए सरकार को मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए मिक्सोपैथी जैसे कदम को वापस लेना होगा।
सीसीआईएम आयुर्वेदिक डॉक्टरों को 58 तरह की सर्जरी करने की मंजूरी देता है। इसमें 39 जनरल सर्जरी है, जिन्हें आयुर्वेद की भाषा में शल्य कहा जाता है। और 19 तरह की सर्जरी नाक, कान, गला, आंख से जुड़ी है, जिसे शल्य कहा जाता है। बुधवार को 6 हजार से ज्यादा मरीजों को इलाज लेने में देरी हुई तो वहीं बहुत से मरीज बिना इलाज के ही घर लौट गए। तो वहीं बहुत से मरीजों ने पर्ची दिखाकर ही मेडिकल स्टोरों से दवा ली।
मिक्सोपैथी के खिलाफ हम आईएमए के साथ है। हम आईएमए की मांगों का पूर्ण रूप से समर्थन करते हैं। डॉक्टरों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी की अनुमति देना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। सरकार को अपना फैसला जल्द वापस लेना चाहिए। हमारा भविष्य में भी समर्थन जारी रहेगा।
-डॉ. नारायण डबास, जिला प्रधान हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन