-मतलौडा, अहर और उरलाना के पावर हाउस 24 घंटे से बंद
-जनरेटर किराये पर लेकर पानी जुटाने को मजबूर ग्रामीण, बिजली कार्यालयों में पसरा सन्नाटा
संवाद न्यूज एजेंसी
मतलौडा। बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी तीन दिन हड़ताल से मतलौडा क्षेत्र में जन जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। मतलौडा, अहर और उरलाना के पावर हाउस बुधवार शाम छह बजे से ही बंद होने से करीब 50 गांवों में बिजली संकट गहरा गया है। बिजली आपूर्ति ठप होने से पेयजल व्यवस्था चरमरा गई है। लोग पीने के पानी तक के लिए तरस रहे हैं और खेतों में सिंचाई भी प्रभावित हो रही है। गांव में अंधेरा छाया हुआ है।
क्षेत्र के बिजली कार्यालयों और पावर हाउसों में सन्नाटा पसरा हुआ है। शिकायत लेकर पहुंचने वाले लोगों की सुनवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों का आरोप है कि फोन पर अधिकारियों से समस्या बताने पर भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। इससे लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
जेनरेटर किराये पर लेकर पानी जुटाने को मजबूर ग्रामीण :
बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण कई गांवों में लोग जेनरेटर किराये पर लेकर पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हैं। जनरेटर का किराया पांच हजार रुपये प्रतिदिन तक पहुंचने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई जगह मोहल्ले के लोग 200-200 रुपये इकट्ठे करके जनरेटर किराये पर ले रहे हैं, ताकि पीने के पानी का इंतजाम हो सके।
ग्रामीण बलवान सिंह, रमेश कुमार और प्रेम सिंह ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। सरकार चाहती तो सेवानिवृत्त बिजली कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुला सकती थी। दूसरे प्रदेशों से कर्मचारी बुलाने या आईटीआई पास एएलएम और अन्य योग्य कर्मियों की सेवाएं लेने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने हड़ताल को सामान्य रूप से लिया और जनता को परेशानी झेलने के लिए छोड़ दिया। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर बिजली आपूर्ति बहाल करने और पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।