पानीपत। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ चुके गरीब और मेधावी बच्चों के लिए गरीब परिवार सहायता समिति उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। पिछले तीन वर्षों से समिति ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रही है। संस्था अब तक करीब 200 बच्चों का स्कूलों और कॉलेजों में दाखिला कराकर उनकी शिक्षा का पूरा दायित्व संभाल चुकी है।
समिति के प्रधान संस्थापक श्यामलाल गर्ग ने बताया कि इस पहल की शुरुआत तीन वर्ष पहले एक सामान्य बैठक के दौरान हुई। बैठक स्थल के बाहर कुछ बच्चों को घूमते देखकर उनके मन में सवाल उठा कि वे स्कूल जाने के बजाय वहां क्यों हैं।
जब बच्चों और उनके अभिभावकों से बातचीत की गई तो पता चला कि कई बच्चे पढ़ाई में प्रतिभाशाली होने के बावजूद आर्थिक अभाव के कारण अपनी शिक्षा बीच में छोड़ चुके हैं। इसी के बाद उन्होंने ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि समिति का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन पढ़ाई में होनहार बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देना है।
इसके लिए समिति के सदस्य पहले बच्चों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जांच करते हैं। संबंधित स्कूलों से उनके रिकॉर्ड की जानकारी ली जाती है। जिन बच्चों ने 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों और आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ दी हो, उन्हें दोबारा स्कूल या कॉलेज में प्रवेश दिलाया जाता है। उनकी पढ़ाई पूरी होने तक का पूरा खर्च समिति वहन करती है।
समिति में करीब 20 सदस्य सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इनमें राजेश गुप्ता, पवन गुप्ता, राजेंद्र खुराना, विजय सैनी, बलदेव खुराना, भूपेंद्र तथा पूर्व मेयर अवनीत कौर सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। समिति बच्चों की स्कूल फीस, यूनिफॉर्म, जूते, किताबें, कॉपियां और अन्य स्टेशनरी सामग्री की व्यवस्था भी करती है, ताकि आर्थिक अभाव उनकी शिक्षा में बाधा न बन सके।
शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार भी निभा रही समिति
श्यामलाल गर्ग ने बताया कि समिति केवल शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सेवा के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया जा चुका है। इसके अलावा गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब और जरूरतमंद लोगों के उपचार में भी समिति सहयोग करती है।