प्रिंसिपल सर हमारे साथ गलत व्यवहार करते हैं। बात-बात पर गाली तक दे देते हैं। उनके गंदे व्यवहार से पूरा स्कूल स्टॉफ, बच्चे यहां तक कि हमारे अभिभावक भी परेशान हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई बोलने को तैयार नहीं है। हमारी स्कूल में साइंस की लैब नहीं है। हमारे टीचर को बिना बात के बिना नोटिस दिए हटा दिया गया। मुख्याध्यापक की तानाशाही से मानसिक पीड़ा हो रही है। इस मामले में हमने उपायुक्त मैडम से भी गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। ये कहना था आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छात्रों का। जिन्होंने स्कूल मुख्याध्यपक की तानाशाही के खिलाफ शनिवार को अपना मोर्चा खोल दिया।
स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ छात्रों ने शनिवार को नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय में प्रदर्शन भी किया। स्कूली बच्चों ने बताया कि इसकी शिकायत दो दिन पहले उपायुक्त से भी की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस बात से खफा होकर प्रिंसिपल ने उनके साइंस टीचर विजेंद्र नारा को भी बिना नोटिस के स्कूल से निकाल दिया है। अध्यापक विजेंद्र नारा पिछले 15 सालों से स्कूल में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनके साथ प्रिसिंपल का बर्ताव भी अमानवीय रहा है। वहीं अध्यापक विजेंद्र नारा ने भी मुख्याध्यापक पर फर्जी बिल पास करवाने, प्रैक्टिल के बदले पैसे लेने व दुर्व्यव्हार करने के कई संगीन आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को मुख्याध्यपक ने बेबुनियाद बताया है।
साला-साला कहते हैं, पैसे के बदले प्रैक्टिकल पास का देते हैं लालच-
स्कूल के बच्चों ने प्रिंसिपल पर बात-बात पर साला-साला की गाली देने का आरोप के अलावा उनके अभिभावकों से भी गलत तरीके से बात करने का आरोप लगाया है। बच्चों ने बताया कि लैब खुलवाने की बजाए प्रिंसिपल उन्हें पैसे के बदले प्रैक्टिकल पास करवाने का लालच देते हैं। उनकी लैब पिछले 6 महीने से बंद पड़ी है। स्कूल में करीब डेढ से दौ सौ बच्चे हैं, जिन्हें लैब की सख्त जरूरत है।
नोटिस पे नोटिस देकर किया प्रताड़ित: नारा
अध्यापक बिजेंद्र नारा ने भी प्रिंसिपल पर उन्हें नोटिस पर नोटिस देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए है। उन्होंने बातया कि उनके क्लास के बच्चों का रिजल्ट हमेशा से 95 प्रतिशत तक रहा है। जबकि प्रिंसिपल उनसे रजिंश के चलते नोटिस दे-देकर परेशान कर रहे हैं। इसके चलते प्रिंसिपल ने उन्हें पढ़ाने के लिए 11वीं-12 वीं कक्षा की बजाए 9वीं-10वीं कक्षाएं दे दी गई।
फर्जी बिल करवाता था
अध्यापक ने प्रिंसिपल ने फर्जी तरीके से बिल पास करवाने के संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्याध्यपक उनकी कार में घूमता था, जबकि इसके बिल अपने नाम से बनवाता हजम कर जाता था। वहीं बच्चों को प्रैक्टिकल में पास करवाने के पैसे भी लेता है। जब अध्यापक ने उनकी इन हरकतों का पता चलने पर विरोध किया तो मुख्याध्यपक ने इस रंजिशन उन्हें स्कूल से निकाल दिया।
वर्जन-
बच्चों को डरा-धमका कर लाए हैं
मामला कुछ नहीं है, यह एक राजनीति है। हम बच्चों की फायदें की बात कर रहे हैं। ये अध्यापक बच्चों को डराते-धमकाते थे, बच्चों को बाहर ट्यूशन पढ़ाते थे, इसके लिए कोचिंग सेंटर चला रहे हैं। हम कोई गाली गलौच नहीं देते। हम बच्चों के हित की बात करते हैं, ये नहीं समझते। बच्चों के अभिभावकों ने भी इस अध्यापक के खिलाफ शिकायत दी थी। इनके पढ़ाने के बाद भी बच्चों का रिजल्ट जीरो है।
गोपाल आर्य, स्कूल प्रिंसिपल।