पानीपत। अब कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत विकास शुल्क होने से 253 कॉलोनियों की पौने दो लाख संपत्तियों पर प्रभाव पड़ा है। शहरी विधानसभा में इसकी तगड़ी मार पड़ी है जबकि ग्रामीण विधानसभा के कुछ क्षेत्रों को मामूली राहत है। अब शहर में महज 100 गज के प्लॉट की एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) के लिए 15,500 से 1,63,000 रुपये अधिक जमा कराने होंगे। कम कलेक्टर रेट वाली एवं हाल ही में नियमित की गईं कॉलोनियों के बाशिंदों को विकास शुल्क में 27 सौ रुपये तक की बचत होगी।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने 18 फरवरी से इसे शहर की सभी वैध कॉलोनियों एवं लालडोरा क्षेत्र पर कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत विकास शुल्क लागू कर दिया है। इससे पहले विकास शुल्क की दर 120 से 302 रुपये प्रति गज निर्धारित थी। ऐसे में जो भवन मालिक 120 और 302 रुपये प्रति गज के हिसाब से विकास शुल्क जमा करा चुके हैं, उन पर भी पांच प्रतिशत विकास शुल्क लागू होगा। ऐसे में इन लोगों को विकास शुल्क के अंतर की राशि जमा करानी होगी। नतीजा अब नगर निगम को सभी संपत्तियों का एनडीसी डाटा फिर से पोर्टल पर अपलोड करना होगा। उसके लिए पौने दो लाख संपत्तियों का डाटा अपडेट करना चुनौती भरा होगा। ऐसे में लोगों के लिए भी यह नई चुनौती साबित होगा। उन्हें फिर चक्कर काटने पड़ेंगे।
इस तरह विकास शुल्क का अंतर बढ़ाएगा लोगों की मुसीबत
एडवोकेट एवं डीड राइटर विकास कुमार और योगेश कुमार ने बताया कि शहर सीमा के वार्डों में 174 कॉलोनियों हैं। इनका विकास शुल्क 120 रुपये प्रति गज था यानि 100 गज के प्लॉट पर 12000 रुपये विकास शुल्क लगता था। नए नियम के मुताबिक अब कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत जमा होना है। अगर किसी कॉलोनी का सबसे कम कलेक्टर रेट 5500 है तो 100 गज की स्टॉम्प ड्यूटी 5,50,000 रुपये बनी, जिसका पांच प्रतिशत 27,500 रुपये विकास शुल्क होगा। यानि 100 गज के प्लाट पर 15,500 रुपये अधिक जमा करने होंगे। इसी तरह जहां 35 हजार कलेक्टर रेट के हिसाब से 100 गज के मकान पर विकास शुल्क 1,75,000 रुपये होगा। जिन्हें 163000 रुपये अधिक जमा कराने होंगे।
नियमित 79 कॉलोनियों में कम कलेक्ट रेट वालों को मिलेगी ये राहत
डीड राइटर ने बताया कि तीन वर्ष पहले नियमित की गईं 79 कॉलोनियों के कुछ लोगों को कुछ राहत दी गई है। इन कॉलोनियों में 100 गज के मकान पर प्रति गज 320 रुपये के हिसाब से विकास शुल्क देना होता था। ऐसे में 100 गज का विकास शुल्क 30,200 रुपये बनता था। अब इन कॉलोनियों को कलेक्टर रेट 5500 के हिसाब से सौ गज के प्लाट पर 27,500 रुपये ही देने होंगे। यहां 2700 रुपये का फायदा होगा।
जो राजस्व आएगा, उससे होंगे विकास कार्य
विकास शुल्क में हुए बदलाव से शहरी सीमा में लोगों की जेब पर असर पड़ेगा जबकि ग्रामीण विधानसभा के लोगों को राहत मिलेगी। पहले सभी के रेट अलग अलग थे अब इनको एक समान कर दिया गया है। विकास शुल्क के नाम पर निगम के पास जो राजस्व आएगा, उससे शहर में विकास कार्य भी तो होंगे। - दुष्यंत भट्ट, वरिष्ठ उप महापौर, पानीपत।