पानीपत। पितृपक्ष मंगलवार को शुरू होगा। पहला श्राद्ध 18 सितंबर को होगा। यह दो अक्टूबर तक रहेंगे। इस बार षष्ठी श्राद्ध और सप्तमी श्राद्ध एक ही दिन होगा। 28 सितंबर को किसी भी तिथि का श्राद्ध नहीं होगा। इसके अतिरिक्त चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध शस्त्र, विष या दुर्घटनाओं (अपमृत्यु) के कारण मृत्यु होने की स्थिति वालों का होगा। भले ही उनकी मृत्यु किसी अन्य तिथि पर हुई हो। चतुर्दशी तिथि के सामान्य मृत्यु का श्राद्ध अमावस्या तिथि पर किया जाता है।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र कुरुक्षेत्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि इस साल पितृपक्ष 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक रहेगा। पितृपक्ष के दौरान शुभ व मांगलिक कार्य जैसे कि शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नई चीजों की खरीदारी भी वर्जित होती है। इसमें केवल पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा है। पितृपक्ष में तिथि अनुसार ही पितरों का श्राद्ध किया जाता है। पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक क्रिया करते हैं। माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितृ धरती पर आते हैं और उनके नाम से किए गए पूजा-पाठ, दान और तर्पण से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक रहता है।
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इस समय करना चाहिए श्राद्ध
शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में सुबह और शाम के समय देवी-देवताओं की पूजा होती है, जबकि दोपहर का समय पितरों को समर्पित होता है। ऐसे पितरों का श्राद्ध दोपहर के समय करना ही उत्तम होता है। पितृपक्ष में किसी भी तिथि पर दोपहर 12 बजे के बाद श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। इसके लिए कुतुप और रोहिण मुहूर्त सबसे अच्छे माने जाते हैं। इस दौरान पितरों का तर्पण करें। ब्राह्मणों को भोज कराएं और उन्हें दान-दक्षिणा दें। श्राद्ध के दिन कौवे, चींटी, गाय, कुत्ते को भोग लगाएं।
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पितृ पक्ष की श्राद्ध तिथियां
मंगलवार, 17 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध
बुधवार, 18 सितंबर- प्रतिपदा श्राद्ध
वीरवार, 19 सितंबर- द्वितीया श्राद्ध
शुक्रवार, 20 सितंबर- तृतीया श्राद्ध
शनिवार, 21 सितंबर- चतुर्थी श्राद्ध
रविवार, 22 सितंबर- पंचमी श्राद्ध
सोमवार, 23 सितंबर- षष्ठी श्राद्ध और सप्तमी श्राद्ध
मंगलवार, 24 सितंबर- अष्टमी श्राद्ध
बुधवार, 25 सितंबर, नवमी श्राद्ध
वीरवार, 26 सितंबर- दशमी श्राद्ध
शुक्रवार, 27 सितंबर- एकादशी श्राद्ध
रविवार, 29 सितंबर- द्वादशी श्राद्ध
सोमवार, 30 सितंबर- त्रयोदशी श्राद्ध
मंगलवार, 1 अक्टूबर- चतुर्दशी श्राद्ध
बुधवार, 2 अक्टूबर- सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध