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पानी नहीं जहर पी रहे लोग!

Wed, 09 Oct 2013 10:58 PM IST
अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत में टेक्सटाइल नगरी की बाहरी 67 अवैध कॉलोनियों के विकास के नाम पर पाबंदी लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
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इन कॉलोनियाें में जन स्वास्थ्य विभाग पेयजल न देकर यह काम निजी पंप संचालकों सौंप रखा है। लोगाें की मानें तो यह पानी जहर से कम नहीं है। पानी को शुद्ध करने के लिए बाहरी कॉलोनियों में एकाध पंप पर ही डोजर है।

जो चालू हालत में हैं उनमें भी कभी कभार ही क्लोरीन डाली जाती है। ऐसे में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। शहर की इन कॉलोनियों में 350 निजी पंप हैं। निजी पंप संचालक प्रतिमाह हर घर में 150 रुपये का बिल लेने के लिए पहुंच जाते हैं। लेकिन घरों में पानी कैसा आ रहा है। इससे किसी को सरोकार नहीं है।
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विकास पर पाबंदी बनी रोड़ा
अवैध कॉलोनियों में विकास कार्य पर पाबंदी लगी है। यहां पब्लिक हेल्थ को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की इजाजत नहीं दी जा रही। लोग पेयजल की समस्या लेकर आए दिन सड़कों पर उतरते हैं। कभी डीसी से मिल रहे हैं तो कभी जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियाें से। कभी मटके फोड़ते हैं तो कभी बोतलों में गंदा पानी लेकर लाचारी दिखाते हैं। इसके बावजूद लोगों की समस्या का कोई समाधान नहीं होता। लोगों की मांग को एक तरफ रखकर नियम और कानून समझा दिए जाते हैं।

कोई नहीं लेता सुध
शहर की बाहरी कालोनियों में लगे ज्यादातर ट्यूबवेलों पर डोजर नहीं हैं। यह ऐसा यंत्र है, जिसके माध्यम से पेयजल में क्लोरीन मिलाकर उसके बैक्टीरिया को खत्म करता है। इससे पानी पीने लायक हो जाता है और लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहता है। लेकिन निजी पंपों पर शायद ही कहीं पर डोजर देखने को मिलेगा। अगर कहीं मिल भी जाता है तो वह खराब मिलेगा। एकाध चालू हालत में होगा वह कभी कभार ही इस्तेमाल में लाया जाता है। जन स्वास्थ्य विभाग की टीम भी ऐसे पंपों पर जाकर डोजर देखने की जहमत नहीं उठाता।

लीकेज से भी पड़ता है असर
घरों में पेयजल की सप्लाई करने वाली पाइप लाइन जगह-जगह पर लीकेज है। जब पानी की सप्लाई आती है तो लीक पाइप लाइन से पानी सड़कों और गलियों में फैल जाता है। सड़कों पर पानी जमा होने से सड़कें भी टूट जाती है। ट्यूबवेल बंद होने पर यही पानी लीक पाइप से अंदर चला जाता है। दोबारा सप्लाई आने के बाद फिर वह गंदा पानी घरों में पहुंच जाता है।

नहीं होती कोई कार्रवाई
पंप संचालक कैसा पानी उपलब्ध कराते हैं? क्या वह पानी पीने लायक है? ऐसा पानी स्वास्थ्य तो नहीं बिगाड़ता? निजी पंपों पर डोजर लगे हैं समेत अन्य बातों की तरफ जन स्वास्थ्य विभाग कोई ध्यान नहीं देता। विभाग के रिकार्ड के अनुसार अब तक विभाग की किसी भी तरह की टीम ने निजी पंपों की जांच से संबंधित कोई अभियान नहीं चलाया।

चुनावों में आती है याद
ऐसी कॉलोनियोें में रहने वालों की सुनें तो जब उनको कोई मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती तो उन्हें वोटर कार्ड, राशन कार्ड, स्कूल, पैन कार्ड की सुविधा क्यों दी जाती है। शहर की गंगारम कालोनी निवासी बलवान सिंह, रघबीर सिंह, रामजुआरी, दत्ता कालोनी निवासी अनिल, राहुल और जावा कालोनी, वधावा राम कालोनी, भूप सिंह, भारत नगर के अजीत सिंह और रामेेहर शर्मा समेत अन्य के निवासियों की माने तो उनको सिर्फ चुनावों के समय ही याद किया जाता है। जब सुविधाओं की बात आती है तो उन्हें अवैध कॉलोनी बताकर एक साइड कर दिया जाता है।
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दूषित पेयजल से होती हैं बीमारियां
फिजीशियन डॉ. रमेश छाबड़ा का कहना है कि दूषित पानी में अमोनिया, फ्लोराइड और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है। इस पानी के लगातार सेवन से नाड़ी तंत्र प्रभावित हो जाता है। इसकी वजह से नाड़ी संबंधी रोग के अलावा दांताें और हड्डियाें के रोग हो जाते हैं।

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